अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) : एक परिचय

अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) सबसे ज्यादा पाया जाने वाला डिमेंशिया है। इस पर जानकारी अन्य डिमेंशिया रोगों से ज्यादा आसानी से मिलती है। इस पृष्ठ पर एक सरल परिचय और कुछ उपयोगी चित्र हैं, और हिंदी साइट और वीडियो के लिंक भी। इस पृष्ठ पर:

(डिमेंशिया के अन्य तीन मुख्य प्रकारों पर प्रकाशित पोस्ट यहाँ देखें: संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia) लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia), और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD) )

अल्ज़ाइमर रोग क्या है (What is Alzheimer’s Disease)

अल्ज़ाइमर रोग सबसे ज्यादा पाया जाने वाला डिमेंशिया है*1

  • इस डिमेंशिया में मस्तिष्क में हुई हानि को दवा से वापस ठीक नहीं किया जा सकता (इर्रिवर्सिबल, irreversible)
  • Dementia India Report 2010 के अनुसार इर्रिवार्सिब्ल डिमेंशिया के केस में से 50 – 75% लोगों को अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) होता है
  • अल्ज़ाइमर रोग अन्य डिमेंशिया के साथ-साथ भी पाया जाता है, जैसे कि वैस्कुलर डिमेंशिया के साथ। इस को मिश्रित डिमेंशिया (मिक्स्ड डिमेंशिया, mixed dementia) कहते हैं
Table 1.1 from Dementia India Report 2010

अल्ज़ाइमर रोग सबसे पहले डॉक्टर Dr. Alois Alzheimer ने पहचाना था, और इस लिए यह रोग उन के नाम से जाना जाता है। पर यह रोग नया नहीं है। इस के लक्षण तो हम सदियों से देखते आ रहे हैं, बस हम यह नहीं जानते थे कि ये लक्षण मस्तिष्क में हो रहे बदलाव के कारण हैं।

Alzheimer's disease-neuron death
अल्ज़ाइमर में मस्तिष्क के सेल (न्यूरोन) में हानि
  • अल्ज़ाइमर रोग में मस्तिष्क में हो रही हानि की खास पहचान हैं: प्लैक और टैंगल (बीटा-एमीलायड प्लैक और न्यूरोफिब्रिलरी टैंगिल, beta-amyloid plaques and neurofibrillary tangles)
  • इन असामान्य खण्डों की वजह से मस्तिष्क के सेल (कोशिकाएं, न्यूरोन) मरने लगते हैं
  • सेल एक दूसरे को सन्देश ठीक से नहीं पहुंचा पाते
  • मस्तिष्क सिकुड़ने लगता है
  • हानि अकसर मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस भाग में शुरू होती है, और धीरे धीरे सभी भागों में फैलने लगती है
  • जैसे-जैसे हानि बढ़ती है, और मस्तिष्क के अनेक भाग ठीक काम नहीं कर पाते

[ऊपर]

अल्ज़ाइमर रोग के लक्षण (Symptoms of Alzheimer’s Disease)

Gray739-emphasizing-hippocampusअकसर हिप्पोकैंपस क्षेत्र अल्ज़ाइमर में सबसे पहले प्रभावित होता है। इस क्षेत्र का सम्बन्ध सीखने और याददाश्त से है।
  • अल्ज़ाइमर रोग में शुरू का आम लक्षण है याददाश्त की समस्या। इस लिए इस रोग को कई लोग भूलने की बीमारी कहते हैं
    • यह स्मृति-लोप की समस्या बहुत धीरे-धीरे बढ़ती हैं, और यह विशेष तौर से हाल में हुई बातों को याद करने की कोशिश करते वक्त नजर आती है
  • अन्य शुरू के लक्षण हैं: डिप्रेशन (अवसाद) और अरुचि/ उदासीनता

मस्तिष्क ठीक काम नहीं कर पाता, इसलिए अन्य लक्षण भी नजर आते हैं, जैसे कि:

  • जगह और समय क्या है, यह ठीक से मालूम नहीं होना (disorientation) भटकने की समस्या आम है (wandering)
  • साधारण रोज-रोज के काम करने में दिक्कत होना, काम बहुत धीरे-धीर करना या उन में मदद की जरूरत होना (problems in daily activities)
  • ध्यान लगाने में दिक्कत (inability to concentrate)
  • नई चीजें न सीख पाना (problems learning new things)
  • अपनी बात बताने में दिक्कत, और दूसरों की बातें समझने में दिक्कत, भाषा की दिक्कत, लिखने में दिक्कत (communication/ language/ writing  problems)
  • चीजें पहचानने में दिक्कत, चित्रों को पहचान ना पाना, दूरी का अंदाजा ठीक से नहीं लगा पाना (problems related to seeing and recognizing)
  • सोचने में और तर्क करने में दिक्कत, हिसाब करने में दिक्कत, समस्याएँ ना सुलझा पाना,  निर्णय लेने में दिक्कत (problems in thinking and reasoning, difficulties in calculations, decision-making and problem solving)
  • व्यक्तित्व और मूड में बदलाव, जैसे कि दूसरों से दूर रहने लगना, चिड़चिड़ा होना  (personality and mood changes, withdrawal)
  • भ्रम होना (delusions)

अल्ज़ाइमर रोग में भी कई उप-प्रकार हैं, जिन में कुछ असामान्य अल्ज़ाइमर रोग (Atypical Alzheimer’s Disease) भी हैं, और इन में लक्षण सामान्य अल्ज़ाइमर रोग से कुछ अलग होते हैं।
[ऊपर]

समय के साथ अल्ज़ाइमर रोग का बढ़ना (Progression of Alzheimer’s Disease)

अल्ज़ाइमर रोग  एक प्रगतिशील रोग है। इस में समय के साथ-साथ हानि बढ़ती रहती है, और लक्षण भी उसी प्रकार गंभीर होते जाते हैं। शुरू में अकसर सिर्फ हिप्पोकैम्पस में हानि होती है, पर यह फैलती जाती है।

रोग का व्यक्ति पर असर किस रफ्तार से और किस तरह बढ़ेगा यह हर केस में फर्क होता है। अंतिम चरण तक पहुँचते-पहुँचते व्यक्ति सभी कामों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। व्यक्ति का चलना फिरना, बोल पाना, यहाँ तक कि खाना निगल पाना, सभी बहुत मुश्किल हो जाता है, और वे पूरे समय बिस्तर पर ही रहते हैं।

अल्ज़ाइमर रोग में मस्तिष्क में किस प्रकार हानि होती है, और समय के साथ यह कैसे बढ़ती है, यह देखने के लिए कुछ चित्रण, National Institute on Aging के सौजन्य से:

Alzheimers disease-brain shrinkage

[ऊपर]

अल्ज़ाइमर रोग: कुछ अन्य तथ्य (Some other facts about Alzheimer’s Disease)

उम्र और अल्ज़ाइमर  संभावना का सम्बन्ध:

  • अल्ज़ाइमर की संभावना उम्र के साथ बढ़ती है, और खास तौर से 65+ के बाद ज्यादा होती है। अधिकांश केस 65+ आयु के लोगों में पाए जाते हैं
  • एक जरूरी तथ्य: अल्ज़ाइमर रोग 65 से कम उम्र के लोगों में भी हो सकता है। इस को यंगर ऑनसेट अल्ज़ाइमर रोग (Younger Onset Alzheimer’s Disease, YOAD) या अर्ली ऑनसेट अल्ज़ाइमर रोग कहते हैं (Early Onset Alzheimer’s Disease, EOAD)

कारक:

  • अल्ज़ाइमर रोग किसी को भी हो सकता है। इस का कोई स्पष्ट कारक नहीं मालूम है।
  • उम्र के साथ-साथ अल्ज़ाइमर रोग की संभावना बहुत बढ़ती है
    • उम्र बढ़ने को इस रोग का सबसे प्रमुख कारक माना जाता है
  • यदि परिवार में किसी को अल्ज़ाइमर है, तो बच्चों में अल्ज़ाइमर की संभावना ज्यादा होती है। इस आनुवंशिकता को ठीक से समझने के लिए अभी रिसर्च चल रहा है।

अवधि:

  • यह रोग प्रगतिशील है और ला-इलाज भी, और इस की अवधि शुरू के लक्षण से लेकर व्यक्ति के मौत तक है।  यह अवधि हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग है, और कुछ साल से लेकर एक या दो दशक भी हो सकती है।
    • कुछ अनुमान के अनुसार प्रारंभिक लक्षण से अंत तक व्यक्ति को औसतन आठ साल लगते हैं

बचाव:

  • अल्ज़ाइमर से बचने का कोई पक्का तरीका अब तक मालूम नहीं है। इस पर जोर-शोर से शोध चल रहा है।
  • अब तक की समझ के हिसाब से कुछ चीजें जिन्हें अपनाने से इसकी संभावना कम होगी :
    • स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, जैसे कि नियमित व्यायाम और पौष्टिक भोजन (हृदय स्वास्थ्य में इस्तेमाल तरीके अल्ज़ाइमर  रोग से बचाव के लिए भी अपना सकते हैं) (adopt a healthy lifestyle, such as regular exercise, nutritious food, and choose heart-healthy options)
    • सक्रिय और सकारात्मक जीवन बिताना, अर्थपूर्ण कम करना (lead an active and positive life, do meaningful activities)
    • अवसाद/ डिप्रेसन से बचना (avoid depression)
    • ऐसे काम करना जिन से मस्तिष्क सक्रिय रहे (keep the brain active)
    • लोगों से मिलना-जुलना, सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना (maintain social relationships and activities)
    • कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से खास तौर बचना, जैसे कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रोल, और हृदय रोग। यह हों तो इन को नियंत्रण में रखना (prevent problems like diabetes, high BP, high cholestrol, and heart disease, or keep them under control)
    • तंबाकू सेवन बंद करना, मद्यपान सीमित रखना (stop tobacco consumption, limit alcohol intake)

[ऊपर]

अल्ज़ाइमर रोग-निदान और उपचार (Diagnosis and Treatment of Alzheimer’s Disease)

रोग-निदान:

अल्ज़ाइमर रोग-निदान के लिए कोई एक विशिष्ट टेस्ट नहीं है। विशेषज्ञ इस का रोग-निदान पूरी चिकित्सीय जाँच के बाद ही दे सकते हैं। वे व्यक्ति के लक्षण समझने की कोशिश करते हैं, व्यक्ति की अन्य बीमारियों की जानकारी प्राप्त करते हैं, फैमिली मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं, और परिवार वालों से भी बात करते हैं। खून के टेस्ट, मानसिक अवस्था के लिए टेस्ट, याददाश्त और सोचने-समझने के लिए टेस्ट, ब्रेन स्कैन, इत्यादि, सब इस चिकित्सीय मूल्यांकन का भाग हैं। (full medical evaluation)

रोग-निदान में गलतियाँ हो सकती है। कुछ उदाहरण:

  • लक्षण धीरे धीरे बढ़ते हैं, और कई बार इन्हें बुढ़ापे की आम समस्या समझ कर नजरअंदाज कर दिया जाता है
  • यदि व्यक्ति में अल्ज़ाइमर रोग सामान्य तरह से पेश नहीं हो, तो यह शायद न पहचाना जाए (जैसे कि कम उम्र में अल्ज़ाइमर)
  • क्योंकि अल्ज़ाइमर रोग के बारे में अन्य डिमेंशिया रोगों से ज्यादा जानकारी और जागरूकता है, इसलिए कभी-कभी मिलते-जुलते लक्षण देखने पर, बिना पूरी जाँच करे, व्यक्ति को अल्ज़ाइमर का रोग-निदान मिल सकता है। व्यक्ति को कोई दूसरी बीमारी है, यह शायद पहचाना न जाए। इस स्थिति में:
    • व्यक्ति को अन्य मौजूद बीमारी का इलाज नहीं मिल पाता है
    • कुछ दवा जो अल्ज़ाइमर रोग में कारगर हैं, वे अन्य रोगों में नुकसान भी कर सकती हैं

अच्छा यही होगा कि परिवार वाले संतोष कर लें कि रोग-निदान के समय सब जाँच हुई है

रोग-निदान जितनी जल्दी हो, उतना अच्छा है, ताकि व्यक्ति उपलब्ध दवा का लाभ उठा सकें, और व्यक्ति और परिवार वाले, सब आगे के लिए योजना बना पाएँ

उपचार:

    • वर्तमान में, दवा से अल्ज़ाइमर रोग न तो रुक सकता है, न ही उसकी प्रगति धीमी करी जा सकती हैं
    • हालांकि मस्तिष्क में हो रही हानि के लिए कोई दवा नहीं है, पर ऐसी कुछ दवा हैं जिन से अल्ज़ाइमर के रोगियों को कुछ राहत मिल सकती है
      • ये दवाएं लक्षणों में कुछ सुधार लाने के लिए इस्तेमाल होती हैं। यह कुछ लोगों में कारगर होती हैं, पर सब में नहीं, और यह शुरू की अवस्था में ज्यादा कारगर होती हैं।

दवा के अतिरिक्त, अन्य भी कई तरीके हैं जिन से व्यक्ति की सहायता करी जा सकती है, जैसे कि घर और वातावरण में बदलाव, और देखभाल और बातचीत के बेहतर तरीके इस्तेमाल करना। व्यक्ति की खुशहाली के लिए इन्हें अपनाना बहुत जरूरी है
[ऊपर]

उपलब्ध जानकारी और सपोर्ट पर कुछ कमेन्ट (Available information and resources: some comments)

डिमेंशिया अनेक रोगों की वजह से हो सकता है, और इन में से अल्ज़ाइमर रोग पर सब से ज्यादा चर्चा होती है। डिमेंशिया समर्थन पर काम करने वाली संस्थाओं के नाम में अकसर अल्ज़ाइमर शब्द होता है, जैसे कि “अल्ज़ाइमर असोसिअशन” या “अल्ज़ाइमर सोसाइटी”। भारत में राष्ट्रीय स्तर के संगठन के नाम में भी अल्ज़ाइमर शब्द है: Alzheimer’s and Related Disorders Society of India (ARDSI)। लेखों में, खबरों में, अन्य जागरूकता के लिए करे गए कार्यक्रमों में, सब में अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया दोनों शब्दों का अदल-बदल कर इस्तेमाल होता है। इस कारण यह नाम भी कई लोग पहचानते हैं, पर इस में क्या लक्षण हैं, और उन का व्यक्ति और परिवार पर क्या असर होता है, इस पर जानकारी कम है।

कई लोग अल्ज़ाइमर को भूलने की बीमारी समझते हैं या इसे वृद्धों की बीमारी के रूप में ही जानते हैं। लोग यह नहीं जानते कि व्यक्ति को बहुत तरह की दिक्कतें होती हैं और समय के साथ-साथ व्यक्ति पूरी तरह लाचार हो जाते हैं, या यह कम उम्र में भी हो सकता है। यानि कि, नाम की पहचान तो है, पर इस रोग का किस-किस पर और कितना गंभीर असर होता है, इस के बारे में लोगों में कई गलत धारणाएँ हैं।

परिवार में यदि किसी को अल्ज़ाइमर है, तो देखभाल की जरूरत होती है, और व्यक्ति की सहायता का काम समय के साथ बढ़ता जाता है। देखभाल कई साल करनी होती है, और इस के लिए परिवार को सही जानकारी, सलाह और सेवाओं की जरूरत होती है। पर भारत में ऐसे बहुत ही कम संस्थाएं और सेवाएं हैं जो इस में उचित जानकारी और सहायता दे सकती हैं।

अफ़सोस, कुछ लोग “अल्ज़ाइमर रोग” से संबंधित आशंका और भय का फायदा उठाते हैं। वे अपनी संस्था/ सेवा के लिए दावा करते हैं कि वे अल्ज़ाइमर रोगियों को उचित सहायता/ सेवा प्रदान कर पायेंगे, और कभी-कभी यह भी गलत दावा करते है कि वे अधिकृत संस्थाओं से जुड़े हैं। पर वास्तव में उनकी जानकारी बहुत ही सीमित होती है। किसी के भी दावे पर विश्वास करने से पहले ऐसे दावों की पुष्टि करनी जरूरी है।

[ऊपर]

अल्ज़ाइमर रोग: मुख्य बिंदु (Salient Points of Alzheimer’s Diseaase)

mantra image
      • अल्ज़ाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण है, और यह डिमेंशिया के करीब 50-75% केस के लिए जिम्मेदार है
        • यह अकेले भी पाया जाता है, और अन्य डिमेंशिया के साथ भी मौजूद हो सकता है (जैसे कि संवहनी मनोभ्रंश या लुई बॉडी डिमेंशिया के साथ)
      • शुरू में इस का आम लक्षण है याददाश्त की समस्या। अन्य आम शुरू के लक्षण हैं अवसाद और अरुचि।
        • लक्षण धीरे धीरे बढ़ते हैं, और शुरू में पता नहीं चलता कि कुछ गड़बड़ है
        • समय के साथ लक्षण बढ़ते जाते हैं और मस्तिष्क के सभी कामों में दिक्कत होने लगती है
        • अंतिम चरण में व्यक्ति पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं
      • इस को रोकने या ठीक करने के लिए दवा नहीं है, पर लक्षणों से राहत देने के लिए कुछ दवा और गैर-दवा वाले उपचार हैं
      • इस से बचने के लिए कोई पक्का तरीका मालूम नहीं है, पर यह माना जाता है कि स्वस्थ जीवन शैली से, व्यायाम से, सक्रिय जीवन बिताने से कुछ बचाव होगा
        • हृदय स्वास्थ्य के लिए जो कदम उपयोगी है, वे इस से बचाव में भी उपयोगी हैं (What is good for the heart is good for the brain)

[ऊपर]


(नोट्स: अधिक जानकारी के लिए लिंक और श्रेय) (Notes: Links and Credits)

*1अन्य प्रमुख डिमेंशिया और उनके लिए लिंक: संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia), और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD)

और देखें:
मस्तिष्क में बदलाव पर हिंदी में वीडियो
एक वीडियो परिचय, डिमेंशिया सलाहकार Atiq Hassan (Bradford,UK)द्वारा:
अल्जाइमर रोग पर एक तीन मिनट का हिंदी “पॉकेट” वीडियो: एल्ज़ाइमर्ज़ रोग क्या है

हमारे हिंदी वेबसाइट पर इस विषय पर पृष्ठ: डिमेंशिया किन रोगों के कारण होता है (Diseases that cause dementia),निदान, उपचार, बचाव (Dementia Diagnosis, Treatment, Prevention)
कुछ अन्य हिंदी लिंक: भारत में स्थित “वाइट स्वान फ़ाउंडेशन फ़ॉर मेंटल हेल्थ”के वेबसाइट पर दो पृष्ठ: अल्ज़ाइमर रोग की समझ और अल्ज़ाइमर रोग, और अमरीका में स्थित Alzheimer’s Association, USA का एक पृष्ठ भारत में अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया
कुछ अंग्रेज़ी लिंक:
What Is Alzheimer’s?(Alzheimer’s Association, USA) और What is Alzheimer’s disease? (Alzheimer’s Society, UK) (अंग्रेज़ी PDF डाउनलोड उपलब्ध)

अल्ज़ाइमर रोग और संबंधित विकारों के लिए कुछ शब्द/ वर्तनी:

  • अल्ज़ाइमर रोग, अल्जाइमर, अल्जाइमर्ज़, अलजाइमर, अलज़ाइमर, एलसायमरस, अलज़ाईमर, एल्ज़ाइमर्ज़, एल्ज़ाइमर, बीटा-एमीलायड प्लैक, न्यूरोफिब्रिलरी टैंगिल
  • Alzheimer’s Disease, beta amyloid plaque, neurofibrillary tangles, young onset Alzheimer’s Disease, early-onset Alzheimer’s Disease, mixed dementia, Atypical Alzheimer’s disease, Posterior cortical atrophy (PCA), Logopenic aphasia, Frontal variant Alzheimer’s disease
श्रेय: (Public domain pictures) neuron death picture: 7mike5000 [CC BY-SA 3.0], via Wikimedia Commons, hippocampus: By Derivative work: Looie496 (File:Gray739.png) [Public domain], via Wikimedia Commons, Pictures of brain changes in AD, and brain shrinkage: By National Institute on Aging [Public domain], via Wikimedia Commons, brain lobs image: Henry Vandyke Carter [Public domain], via Wikimedia Commons

[ऊपर]

ब्लॉग एंट्री शेयर करने के लिए नीचे दिए बटन का इस्तेमाल करें. आपके कमेंट भी आमंत्रित हैं. धन्यवाद!

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD): एक परिचय

, फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (मनोभ्रंश) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है। यह अन्य प्रकार के डिमेंशिया से कई महत्त्वपूर्ण बातों में फर्क है और इस कारण अकसर पहचाना नहीं जाता। देखभाल में भी ज्यादा कठिनाइयाँ होती हैं। इस पृष्ठ पर:

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया क्या है (What is Frontotemporal Dementia) (FTD)

  • फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Fronto-Temporal Dementia, FTD) चार प्रमुख प्रकार के डिमेंशिया (मनोभ्रंश) में से एक है*1
    • इस डिमेंशिया में हुई मस्तिष्क की हानि को दवाई से पलटा नहीं जा सकता (इर्रिवर्सिबल, irreversible)
      • व्यक्ति का मस्तिष्क फिर से सामान्य नहीं हो सकता
    • मस्तिष्क की हानि समय के साथ बढ़ती जाती है (प्रगतिशील डिमेंशिया, प्रगामी डिमेंशिया, progressive dementia)
      • अंतिम चरण में फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया डिमेंशिया वाले व्यक्ति सब कामों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं
  • यह डिमेंशिया अन्य प्रकार के डिमेंशिया से कई महत्त्वपूर्ण बातों में फर्क है
  • सभी डिमेंशिया में मस्तिष्क में किसी भाग में क्षति होती है, जिस के कारण लक्षण पैदा होते हैं। फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में यह क्षति मस्तिष्क के दो खंडों में होती है
    • ललाटखंड (अग्र खंड, फ्रंटल लोब, frontal lobe)
    • शंख खंड (कर्णपट खंड, टेम्पोरल लोब, temporal lobe)
  • प्रभावित खंडों में कुछ असामान्य प्रोटीन इकट्ठा होने लगते हैं, कोशिकाएं मरने लगती हैं, जरूरी रसायन ठीक से नहीं बन पाते, और लोब सिकुड़ने लगते हैं
  • इस हानि के कारण व्यक्ति को उन लोब के काम से संबंधित लक्षण होने लगते हैं

FTD brain lobes
[ऊपर]

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया के लक्षण (Symptoms of Frontotemporal Dementia)

  • शुरू के आम लक्षण: व्यक्तित्व और व्यवहार में बदलाव, और भाषा संबंधी समस्याएँ
    • याददाश्त अकसर ठीक रहती है
    • व्यक्ति में कौन से लक्षण होंगे यह इस पर निर्भर है कि फ्रंटल और टेम्पोरल लोब में कहाँ-कहाँ और कितनी क्षति हुई है
  • व्यक्तित्व/ व्यवहार संबंधित लक्षणों के उदाहरण:
    • व्यक्ति का मेल-जोल कम हो जाना, व्यक्ति का अपने में ही सिमट जाना
    • दूसरों की भावनाओं की परवाह न करना, सहानुभूति न दिखा पाना
    • परेशान/ बेचैन रहना, व्यवहार या बात दोहराना, चीजें छुपाना, शक्की होना, उत्तेजित होना, चिल्लाना, आक्रामक होना (दूसरों को मारना)
    • रात में अधिक विचलित होना और सो न पाना
    • कुछ तरह की चीजों को खाने की खास इच्छा, जैसे कि मिठाई या ताली हुई चीजें
    • अनुचित , अशिष्ट, अश्लील व्यवहार,  समाज में ऐसा व्यवहार करना जो खराब समझा जाता है
    • ध्यान न लगा पाना, निर्णय लेने में दिक्कत, पैसे का मूल्य समझने में दिक्कत,  सोच-विचार न कर पाना
  • भाषा संबंधित लक्षणों के उदाहरण
    • सामान्य, रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले शब्दों का अर्थ पूछना, सही शब्द न सूझना और उस का वर्णन करना
    • परिचित लोगों या वस्तुओं को पहचानने में दिक्कत
    • शब्द समझ पाना पर वाक्य न समझ पाना, खास तौर से लंबे, उलझे हुए वाक्य
    • धीरे-धीरे, झिझक कर बोलना, शब्द उच्चारण में दिक्कत और गलतियाँ, हकलाना, वाक्यों में से छोटे शब्दों को छोड़ देना या व्याकरण में गलती होना
  • अन्य रोगों के साथ पाए जाने वाले FTD के केस में
    • FTD वाले व्यक्ति को साथ-साथ अन्य  विकार भी होते हैं जिन से चलने में दिक्कतें भी होने लगती है। गति धीमी हो सकती है, संतुलन में दिक्कत हो सकती है, निगलने में भी दिक्कत होने लगती है, और पार्किन्सन जैसे कुछ लक्षण हो सकते हैं

[ऊपर]

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया वर्ग में शामिल रोग (Various Medical conditions of Frontotemporal dementia)

  • फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया किसी एक विशिष्ट रोग का नाम नहीं है
  • इस में अनेक रोग शामिल हैं जो मस्तिष्क के फ्रंटल और टेम्पोरल लोब की हानि से संबंधित हैं
    • इन रोगों में से सबसे पहले पिक रोग (Pick’s Disease) की पहचान हुई थी। कई लोग अब भी फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया को पिक रोग के नाम से ही बुलाते हैं
    • इस के अन्य भी कई नाम हैं (नीचे नोट्स देखें)
    • अब भी इस पर नई जानकारी प्राप्त हो रही है, और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया के नए प्रकार पहचाने जा रहे हैं
    • इस श्रेणी के रोगों का वर्गीकरण (categorization, classification) विशेषज्ञ अलग-अलग तरह से करते हैं

मोटे तौर पर, फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया के प्रकार हैं:

  • व्यवहार-संबंधी रूप (Behavioural variant Fronto-Temporal Dementia, BvFTD)
    • इस में व्यक्तित्व या व्यवहार में बदलाव नज़र आते हैं
    • उदाहरण: व्यक्ति मिलना जुलना बंद कर सकते हैं, अपने आप में सिमट सकते हैं। या औरों के प्रति निरादर या लापरवाही दिखा सकते हैं। अनुचित व्यवहार कर सकते हैं, आक्रामक हो सकते हैं, या उन्माद दिखा सकते हैं
  • भाषा संबंधी रूप (Language variants of frontotemporal dementia):
    • अर्थ -संबंधी डिमेंशिया (सिमैंटिक डिमेंशिया , semantic dementia):
      • बोल सकते हैं, पर शब्द का अर्थ नहीं समझते,बोलते हुए अजीब अजीब शब्दों का प्रयोग करते हैं—उनकी बात का अर्थ नहीं निकलता
    • प्रगतिशील गैर-धाराप्रवाह वाचाघात (progressive non-fluent aphasia):
      • बोलने में दिक्कत होती है, और वे धीरे धीरे और बहुत कठिनाई से बोलते हैं
  • अन्य रूप, खास रूप, मिश्रित रूप  
    • FTD अन्य रोगों के साथ भी हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार करीब 10 से 20% FTD केस में साथ साथ मोटर न्यूरान संबंधित हानि भी होती है (overlapping motor disorders), जिस से संतुलन में और हिलने/ डुलने/ चलने में समस्या होती है, और पार्किंसन किस्म के लक्षण भी हो सकते हैं<
      • कुछ उदाहरण: मोटर न्यूरान रोग (motor neurone disease), प्रगतिशील सुप्रान्यूक्लियर अंगघात (progressive supranuclear palsy), कोर्टिको-बैसल अपह्रास (corticobasal degeneration)

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया डिमेंशिया: कुछ महत्वपूर्ण तथ्य (Some important facts about Fronto Temporal Dementia)

age profile of FTD

संभावना: अब तक उपलब्ध जानकारी:

  • आयु
    • हालांकि यह सभी उम्र के लोगों में पाया जा सकता है , पर इसके अधिकांश केस कम उम्र के लोगों में देखे जाते हैं (40 – 65 आयु वर्ग में)
    • ध्यान दें, अल्ज़ाइमर रोग की संभावना उम्र के साथ इस की संभावना बढ़ती है और अल्ज़ाइमर के अधिकांश केस 65+ आयु वर्ग में होते हैं
    • 65 से कम आयु के लोगों में देखे जाने वाले डिमेंशिया केस में यह एक महत्व-पूर्ण डिमेंशिया है
genetics image
  • रिस्क फैक्टर (risk factor): किन बातों से इस के होने के संभावना ज्यादा होती है
    • इस का कारक स्पष्ट रूप से मालूम नहीं, पर यह माना जाता है कि यह आनुवांशिकी, स्वास्थ्य-समस्या संबंधी, और जीवन-शैली संबंधी कारणों का मिश्रण हैं
    • अभी तक सिर्फ एक रिस्क फैक्टर पहचाना गया है: फैमिली हिस्ट्री (family history)–माँ-बाप, भाई-बहन, अन्य पीढ़ियों में अन्य करीबी रिश्तेदार को फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया या अन्य ऐसे किसी रोग का होना (fronto-temporal dementia or other neuro-degenerative diseases)
    • इस डिमेंशिया की यह आनुवांशिकी अन्य मुख्य डिमेंशिया के प्रकारों के मुकाबले ज्यादा है
  • National Institute of Aging (USA) की FTD की विषय-पत्रिका के अनुसार करीब 15 से 40 % केस में कोई आनुवांशिकी (जेनेटिक, हेरिडिटरी, genetic)) कारण पहचाना जा सकता है

अवधि

  • फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया एक प्रगतिशील प्रकार का डिमेंशिया है (प्रगामी, progressive) और समय के साथ व्यक्ति की हालत बिगड़ती जाती है, और अंतिम चरण में व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होने लगते हैं
  • इस की अवधि हर व्यक्ति में फर्क है, पर आम तौर पर माना जाता है कि शुरू से अंतिम चरण तक 2 से 10 साल लग सकते हैं
    • औसतन लोग लक्षणों के आरम्भ के बाद करीब 8 साल जीवित रहते हैं

[ऊपर]

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया रोग-निदान और उपचार (Frontotemporal Dementia Diagnosis and Treatment)

रोग-निदान: कई कारणों से यह कई बार पहचाना नहीं जाता

  • प्रारंभिक लक्षण “भूलने की बीमारी” से नहीं मिलते, इसलिए परिवार और डॉक्टर उन पर ध्यान नहीं देते
    • परिवार वाले डॉक्टर से सलाह करने के बारे में नहीं सोचते
  • अगर 65 से कम उम्र के व्यक्ति में लक्षण होते हैं, तो लोग डिमेंशिया के बारे में नहीं सोचते
    • बदले व्यवहार को लोग बदले चरित्र की निशानी या तनाव (स्ट्रेस, stress) का नतीजा समझते हैं
  • डॉक्टर और विशेषज्ञों को भी फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया का कम अनुभव होता है
    • सही निदान मिलने में देर हो सकती है

उपचार

medicine pill
  • अभी तक इस से हो रही हानि को वापस ठीक करने के लिए कोई दवा नहीं है। हानि की प्रगति को रोकने या धीरे करने के लिए भी कोई दवा नहीं है
  • डॉक्टर की कोशिश रहती है कि व्यक्ति को लक्षणों से कुछ राहत दें
    • व्यवहार-संबंधी लक्षण चिंताजनक हों तो डॉक्टर ऐसी दवाएं देने की कोशिश करते हैं जो जिन से व्यवहार में कुछ सुधार हो पाए
    • बोलने में दिक्कत हो तो स्पीच थेरपी से कुछ केस में कुछ आराम मिल सकता है
    • पार्किंसन किस्म के लक्षण हों तो डॉक्टर शायद कुछ पार्किसन की दवा भी दें
    • व्यायाम (एक्सर्साइज) से, और शारीरिक और व्यावसायिक उपचार से भी कुछ आराम हो सकता है (physical and occupational therapy)

देखभाल में पेश खास कठिनाइयाँ (Special challenges faced in caregiving)

अन्य डिमेंशिया के मुकाबले फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया में देखभाल में चुनौतियाँ अधिक हैं, और देखभाल ज्यादा मुश्किल और तनावपूर्ण होती है

  • इस डिमेंशिया में अकसर व्यवहार संभालना ज्यादा मुश्किल रहता है
  • निदान के समय व्यक्ति अकसर कमाने वाली उम्र में होते हैं, और उनकी ज़िम्मेदारियाँ ज्यादा होती हैं। बचत राशि अकसर कम होती है। देखभाल करने वाले भी नौकरी नहीं कर पाते।  पैसे की मुश्किल आम है।  बच्चों की उम्र भी कम होती है, और उनकी पढ़ाई वगैरह की जिम्मेदारी और खर्च ज्यादा होते हैं ।
  • जवान व्यक्ति के आक्रामक व्यवहार को संभालना ज्यादा कठिन है
  • अनुचित व्यवहार के कारण समाज में और रिश्तेदारी में समस्या
  • जानकारी इतनी कम है कि आस-पास के लोग रोग-निदान पर यकीन नहीं करते और व्यक्ति के चरित्र को खराब समझते हैं
  • देखभाल सेवाएँ और “होम” बहुत ही कम
    • ये सेवाएं और “होम” सब वृद्धों के लिए हैं, और जवान, ताकतवर रोगियों के लिए उपयुक्त नहीं हैं

[ऊपर]

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया: मुख्य बिंदु (Salient Points about Frontotemporal Dementia)

  • फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है जो अन्य डिमेंशिया के प्रकार से कुछ मुख्य बातों में बहुत फर्क है।  इस वजह से इस का सही रोग-निदान बहुत देर से होता है
    • इस के अधिकांश केस 65 से कम उम्र के लोगों में होते हैं
    • इस के प्रारंभिक लक्षण व्यक्तित्व और व्यवहार में बदलाव और भाषा संबंधी समस्याएँ
      • शुरू में याददाश्त संबंधी लक्षण नहीं होते
  • यह प्रगतिशील और ला-इलाज है—अभी इस को रोकने या धीमे करने के लिए कोई दवाई नहीं है
    • इलाज और देखभाल में दवा से, व्यायाम से, शारीरिक और व्यावसायिक थेरपी से और स्पीच थेरपी से व्यक्ति को कुछ राहत देने की कोशिश करी जाती है
  • इस डिमेंशिया का अब तक मालूम रिस्क फैक्टर (कारक) सिर्फ फैमिली हिस्ट्री है (परिवार में अन्य लोगों को यह या ऐसा कोई रोग होना)
  • इस डिमेंशिया में देखभाल कई कारणों से बहुत मुश्किल होती है, जैसे कि
    • पैसे की दिक्कत, बदला व्यवहार संभालना ज्यादा मुश्किल, समाज में बदले व्यवहार के कारण दिक्कत, बाद में व्यक्ति की शारीरिक कमजोरी के संभालने में दिक्कत
    • उपयुक्त सेवाएँ बहुत ही कम हैं, और स्वास्थ्य कर्मियों में भी जानकारी बहुत ही कम
  • फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया पर विशिष्ट संस्थाएं और ऑनलाइन सपोर्ट: अधिकांश उपलब्ध जानकारी और सपोर्ट अल्ज़ाइमर रोग के लिए तैयार करी गयी है, परन्तु फ्रंटो-टेम्पोरलडिमेंशिया अल्ज़ाइमर रोग से कई महत्त्वपूर्ण बातों में फर्क है और इस लिए कई पहलू हैं जिन पर आम संसाधनों से उपयोगी जानकारी नहीं मिल पाती। यदि आप को या आपके किसी प्रियजन को FTD हो तो जानकारी और सपोर्ट के लिए विशिष्ट FTD संसाधन का भी इस्तेमाल करें

[ऊपर]


(नोट्स: अधिक जानकारी के लिए लिंक, और चित्रों के लिए श्रेय)
*1अन्य प्रमुख डिमेंशिया और उन पर प्रकाशित पोस्ट: अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) (सबसे आम डिमेंशिया रोग), संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia), और लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia)

और देखें:

फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया और संबंधित विकारों के लिए कुछ शब्द/ वर्तनी:

  • फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया, फ्रंटल लोबर डिमेंशिया, फ्रंटोटेम्पोरल लोबर डीजेनेरेशन, फ्रंटो-टेम्पोरल डीजेनेरेशन, फ़्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया, , पिक रोग, मोटर न्यूरान रोग, व्यवहार-संबंधी फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया, भाषा संबंधी फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया, अर्थ -संबंधी डिमेंशिया, सिमैंटिक डिमेंशिया, प्रगतिशील गैर-धाराप्रवाह वाचाघात, मोटर न्यूरान रोग, प्रगतिशील सुप्रान्यूक्लियर अंगघात, कोर्टिको-बैसल अपह्रास
  • Frontotemporal dementia, Frontotemporal degeneration, Frontal lobe degeneration, FTD, Pick’s Disease, Behavioural variant Fronto-Temporal Dementia, BvFTD, Language variants of frontotemporal dementia, semantic dementia), progressive non-fluent aphasia,  motor neurone disease,  progressive supranuclear palsy,  corticobasal degeneration
चित्र का श्रेय: (Public domain pictures) मस्तिष्क का चित्र: Henry Vandyke Carter [Public domain], via Wikimedia Commons

[ऊपर]

ब्लॉग एंट्री शेयर करने के लिए नीचे दिए बटन का इस्तेमाल करें. आपके कमेंट भी आमंत्रित हैं. धन्यवाद!

लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia): एक परिचय

लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है जिसके बारे में जानकारी बहुत कम है और जो अकसर पहचाना नहीं जाता। नतीजन, परिवार वाले यह नहीं जान पाते कि आगे क्या क्या होगा, देखभाल की तय्यारी कैसे करें, और किन बातें के प्रति सतर्क रहें। इस पृष्ठ पर:

लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) क्या है (What is Lewy Body Dementia)

    • लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia, LBD) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया (मनोभ्रंश) है*1
    • इस डिमेंशिया में हुई मस्तिष्क की हानि को दवाई से पलटा नहीं जा सकता (इर्रिवर्सिबल, irreversible)
      • व्यक्ति का मस्तिष्क फिर से सामान्य नहीं हो सकता
    • मस्तिष्क की हानि समय के साथ बढ़ती जाती है (प्रगतिशील डिमेंशिया, प्रगामी डिमेंशिया, progressive dementia)
      • अंतिम चरण में लुई बॉडी डिमेंशिया वाले व्यक्ति सब कामों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं
lewy body in neuron
  • इस डिमेंशिया की खास पहचान: मस्तिष्क के कुछ न्यूरान (neuron, कोशिका/ सेल) में “लुई बॉडी” नामक असामान्य गुच्छों पाए जाते हैं
    • इस असामान्य संरचना के कारण ये सेल ठीक काम नहीं करते
  •  यह असामान्य संरचना मस्तिष्क के कई भागों में पाई जाती है
    • इन में अकसर वे क्षेत्र भी मौजूद हैं जो पार्किंसन रोग में प्रभावित होते हैं
  • लुई बॉडी डिमेंशिया अन्य डिमेंशिया रोगों के साथ भी मौजूद हो सकता है, खासकर अल्ज़ाइमर के साथ (मिश्रित डिमेंशिया)

[ऊपर]

जानकारी की कमी (Information/ awareness about LBD is very low)

  • आम लोगों ने डिमेंशिया या अल्ज़ाइमर का नाम तो शायद सुना हो, पर वे लुई बॉडी डिमेंशिया के बारे में नहीं जानते
    • डॉक्टरों में भी लुई बॉडी डिमेंशिया  के बारे में कम जानकारी है, और इस को पहचानने का, और इसका इलाज करने का बहुत कम अनुभव  है।
  • कुछ मुख्य बिंदु
    • “लुई बॉडी” संरचना (असामान्य प्रोटीन डिपॉजिट का गुच्छा) सबसे पहले 1912 में एक पार्किंसन के रोगी में पहचाना गया
    • “लुई बॉडी” संरचना से संबंधित डिमेंशिया का रोग निदान सिर्फ 1990 के दशक से शुरू
      • निदान प्रणाली और मापदंड पर अब भी चर्चा जारी है
    • यह डिमेंशिया कितने लोगों को है, इस पर भी विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है
    • विशेषज्ञों का कहना है इस से ग्रस्त कई व्यक्तियों को सही रोग निदान नहीं मिलता, और लुई बॉडी डिमेंशिया वाले व्यक्ति को कई बार पार्किंसन रोग का या अल्ज़ाइमर रोग का निदान दिया जाता है

[ऊपर]

लुई बॉडी डिमेंशिया के लक्षण (Symptoms of Lewy Body Dementia)

  • लुई बॉडी डिमेंशिया में पाए जाने वाले कुछ विशिष्ट लक्षण:
    • सोच-विचार की क्षमताएं कम होती हैं और रोज-रोज बहुत बदलती हैं (स्पष्ट और बड़े-बड़े उतार-चढ़ाव) (marked fluctuations in cognitive abilities)
    • विभ्रम, खास तौर से दृष्टि विभ्रम : ऐसी चीजें देखना जो मौजूद नहीं हैं (दृष्टि विभ्रम, चाक्षुष मतिभ्रम, visual hallucinations), ऐसी चीजें सुनना जो हैं नहीं  (श्रवण मतिभ्रम, auditory hallucinations)। विभ्रम करीब 80% रोगियों में पाया जाता है, और अधिकतर यह दृष्टि विभ्रम होता है
    • पार्किन्सन लक्षण: कंपन (ट्रेमर), जकड़न, पैर घसीटना, धीमापन और गति में बदलाव, झुक का चलना, बारीक काम में दिक्कत (जैसे कि लिखना, सुई पिरोना), चेहरे पर भाव की कमी
    • नींद से जुड़ा विकार: नींद में ही सपनों पर अमल करना, जैसे कि सोते-सोते जोर से हँसना, चिल्लाना, हाथ-पैर मारना, बिस्तर से गिर जाना—यानि कि, REM नींद संबंधित व्यवहार विकार
  • अन्य लक्षण: याददाश्त की समस्या, प्रॉब्लम सुलझाने में दिक्कत, तर्क करने में दिक्कत, निर्णय ठीक से न ले पाना, दूरी का अंदाज़ा न लगा पाना, वस्तुओं को पहचान न पाना, समय और जगह की पहचान न रहना, वगैरह
    • लुई बॉडी डिमेंशिया में याददाश्त की समस्या अल्ज़ाइमर जितनी नहीं देखी जाता

[ऊपर]

रोग निदान संबंधित शब्दावली (Terms used while diagnosing)

रोग-निदान के समय डॉक्टर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करते है, जिससे कई परिवार वाले कन्फ्यूज हो सकते हैं। इस पर छोटा सा परिचय:

  • कुछ डॉक्टर इस डिमेंशिया को कभी “डिमेंशिया विद लुई बॉडीज” कहते हैं और कभी “लुई बॉडी डिमेंशिया
  • कुछ डॉक्टर एक निदान प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं जिस में वे लुई बॉडी डिमेंशिया नाम के अंतर्गत दो अलग रोग निदान पहचानते हैं–पार्किंसंस वाला डिमेंशिया (Parkinsonian dementia) और डिमेंशिया विद लुई बॉडीज (Dementia with Lewy Bodies)

diagnosis of LBD as parkinsonian dementia or dementia with lewy bodies

लुई बॉडी डिमेंशिया: कुछ अन्य तथ्य (Some other facts about Lewy Body Dementia)

parkinson man
एक अनुमान के अनुसार पार्किंसंस वाले व्यक्तियों में से करीब 1/3 व्यक्तियों  को आगे जा कर डिमेंशिया हो सकता है

संभावना: अब तक उपलब्ध जानकारी:

  • संभावना उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है और अधिकांश केस 50+ आयु के लोगों में हैं
  • महिलाओं के मुकाबले यह पुरुषों में अधिक पाया जाता है
  • पार्किंसंस वाले लोगों में इस की ज्यादा संभावना होती है

प्रगति

  • मस्तिष्क में हो रही हानि समय के साथ बढ़ती है
    • अंतिम अवस्था में व्यक्ति पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो सकता है
  • यह  2 से 20 साल तक चल सकता है (प्रारंभिक अवस्था/ निदान से लेकर मृत्यु तक का फासला) पर औसतन अवधि 5 से 7 साल है

[ऊपर]

लुई बॉडी डिमेंशिया और उपचार (Lewy Body Dementia Treatment)

medicine pill
  • वर्तमान में, दवा से लुई बॉडी डिमेंशिया न तो रुक सकता है, न ही उसकी प्रगति धीमी करी जा सकती हैं
  • ऐसे में व्यक्ति को लक्षणों से राहत देना अहम हो जाता है, ताकि व्यक्ति को कम दिक्कतें हों
    • इस के लिए दवाई, घर और वातावरण में बदलाव, और देखभाल और बातचीत के बेहतर तरीके इस्तेमाल करे जाते हैं
  • कुछ दवाएं अल्ज़ाइमर या पार्किंसन रोग में कारगर हो सकती हैं पर लुई बॉडी केस में लक्षणों को बिगाड़ सकती हैं
    • कई बार लुई बॉडी डिमेंशिया वाले व्यक्ति को अल्ज़ाइमर का गलत निदान मिल सकता है। इस स्थिति में डॉक्टर अल्ज़ाइमर की दवाई देंगे
    • पार्किन्सन लक्षणों से राहत देने के लिए डॉक्टर पार्किंसन रोग में दी जाने वाली दवाई दे सकते हैं
    • लुई बॉडी डिमेंशिया वाले व्यक्ति में ऐसी कुछ दवाओं से नुकसान हो सकता है
  • रोग निदान के बारे में थोड़ा सा भी शक हो तो डॉक्टर से बात करें
  • सतर्क रहें कि दवा से नुकसान तो नहीं हो रहा। व्यवहार संबंधी दवा (ऐन्टी साइकाटिक, anti-psychotic) के दुष्प्रभाव के प्रति खास तौर से सतर्क रहें

[ऊपर]

लुई बॉडी डिमेंशिया: मुख्य बिंदु (Salient Points about Lewy Body Dementia)

  • लुई बॉडी डिमेंशिया एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है। यह ठीक नहीं हो सकता और समय के साथ व्यक्ति की हालत खराब होती जाती है
    • इस के बारे में जानकारी बहुत कम है
  • इस की खास पहचान है मस्तिष्क की कोशिकाओं में “लुई बॉडी” नामक असामान्य संरचना की उपस्थिति
  • लक्षण:
    • विशिष्ट लक्षण: दृष्टि विभ्रम, सोचने-समझने की क्षमता कम होना, और इन का रोज-रोज बहुत भिन्न होना, पार्किंसन लक्षण (जैसे कंपन, जकड़न, धीमापन, पैर घसीटना, इत्यादि) नींद में व्यवहार संबंधी समस्याएँ
    • अन्य डिमेंशिया लक्षण भी प्रकट होते हैं
  • अभी इस को रोकने या धीमे करने के लिए कोई दवाई नहीं है
    • इलाज और देखभाल में व्यक्ति को लक्षणों से कुछ राहत देने की कोशिश रहती है
  • सही रोग निदान मिलने में दिक्कत हो सकती हैं
  • कुछ आम-तौर डिमेंशिया में इस्तेमाल होने वाली दवाओं से लुई बॉडी डिमेंशिया वाले लोगों को नुकसान हो सकता है। सतर्क रहना जरूरी है
  • लुई बॉडी डिमेंशिया से संबंधित कुछ खास संसाधन हैं। अधिक जानने के लिए और वर्तमान जानकारी के अपडेट पाने के लिए इन से संपर्क करें। कुछ ऑनलाइन समुदाय भी हैं जहाँ लोग इस से संबंधित अनुभव और सुझाव बांटते हैं। आप यदि इस डिमेंशिया से ग्रस्त हैं, या इस से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल कर रहे हैं, तो इन में अनुभव और सुझाव बाँट सकते हैं

[ऊपर]


(नोट्स: अधिक जानकारी के लिए लिंक, और चित्रों के लिए श्रेय)
*1अन्य प्रमुख डिमेंशिया और उन पर प्रकाशित पोस्ट: अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) (सबसे आम डिमेंशिया रोग), संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia), और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD)

और देखें:

लुई बॉडी डिमेंशिया और संबंधित विकारों के लिए कुछ शब्द/ वर्तनी:

  • लेवी बॉडीज़ , लेवी बॉडीज़ के साथ डिमेंशिया, : लुई बाड़ी, लुई बाड़िज़, लुई बाड़िज़ वाला डिमेंशिया , लेवी बॉडीज़, लेवी बॉडीज़ वाला डिमेन्शिया, पार्किंसंस, पार्किंसन, पर्किन्सन , पार्किन्सन
  • Lewy Body Dementia (LBD), Dementia with Lewy Bodies (DLB), Parkinsonian Dementia, Parkinson’s Disease
चित्रों का श्रेय: कोशिका में लुई बॉडी का चित्र: Marvin 101 (Own work) [CC BY-SA 3.0] (Wikimedia Commons) पार्किन्सन के व्यक्ति का चित्र: By Sir_William_Richard_Gowers_Parkinson_Disease_sketch_1886.jpg: derivative work: Malyszkz [Public domain], via Wikimedia Commons

[ऊपर]

ब्लॉग एंट्री शेयर करने के लिए नीचे दिए बटन का इस्तेमाल करें. आपके कमेंट भी आमंत्रित हैं. धन्यवाद!

संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia): एक परिचय

संवहनी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है, और इस के बारे में जानने से आप इसे ज्यादा आसानी से पहचान पायेंगे, और इस से बचने के लिए अपनी जिंदगी में उचित बदलाव के बारे में भी सोच पायेंगे. इस पृष्ठ पर:

संवहनी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) क्या है (What is Vascular Dementia)

संवहनी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है*1

  • इस डिमेंशिया में मस्तिष्क में हुई हानि को दवा से वापस ठीक नहीं किया जा सकता (इर्रिवर्सिबल, irreversible)
  • Dementia India Report 2010 के अनुसार इर्रिवार्सिब्ल डिमेंशिया के केस में से व्यक्ति को 20-30% संवहनी डिमेंशिया (वैस्क्युलर डिमेंशिया, vascular dementia) होता हैं
Table 1.1 from Dementia India Report 2010
brain vascular system
  • अंग्रेज़ी शब्द वैस्कुलर (और हिंदी शब्द ‘संवहनी’) का अर्थ है: रक्त वाहिकाओं (खून की नलिकाएं, blood vessels) से संबंधित
  • रक्त वाहिकाओं के द्वारा शरीर के हर भाग में आक्सीजन और जरूरी पदार्थ पहुंचाए जाते हैं
  • हमारे मस्तिष्क में भी रक्त वाहिकाओं का एक नेटवर्क होता है (वैस्क्युलर सिस्टम)
    • मस्तिष्क के ठीक काम करने के लिए मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं का ठीक रहना बहुत ज़रूरी
  • संवहनी डिमेंशिया में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है, और इसकी वजह से डिमेंशिया लक्षण पैदा होते हैं
    • मस्तिष्क के कुछ भागों में खून की सप्लाई (blood supply) में रुकावट हो जाती है
    • खून ठीक न पहुँचने के कारण उन भागों में कोशिकाएं (सेल, cells) मर जाती हैं
    • इस के कारण वे भाग ठीक काम नहीं कर पाते, और डिमेंशिया के लक्षण पैदा होते हैं
  • संवहनी डिमेंशिया के मुख्य प्रकार हैं:
    • स्ट्रोक से संबंधित डिमेंशिया (Stroke-related dementia)
    • सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया (Subcortical vascular dementia)

[ऊपर]

स्ट्रोक से संबंधित डिमेंशिया (Stroke-related Dementia)

खून की सप्लाई में कमी के कुछ कारण
block in blood vessel
burst blood vessel
  • स्ट्रोक (पक्षाघात) में मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह कुछ भागों में कुछ देर के लिए नहीं हो पाता
    • यह रक्त वाहिका में बाधा से हो सकता है, जैसे कि रक्त का थक्का (clot) वाहिका को बंद कर दे
    • यह वाहिका के फटने से भी हो सकता है
  • कई लोग स्ट्रोक के बाद ठीक हो पाते हैं
  • पर कुछ लोगों में स्ट्रोक से हुई मस्तिष्क की हानि पूरी तरह ठीक नहीं होती, जिस से डिमेंशिया के लक्षण नज़र आ सकते हैं
  • अल्ज़ाइमर सोसाइटी UK की “What is vascular dementia?” पत्रिका के अनुसार
    • लगभग 20% स्ट्रोक केस में छह महीनों में डिमेंशिया के लक्षण नज़र आ सकते हैं
    • एक बार स्ट्रोक हो, तो आगे भी स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है, और इस वजह से डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है

बार-बार मिनी स्ट्रोक से भी हानि

  • कुछ लोगों को बहुत छोटे-छोटे स्ट्रोक (मिनी-स्ट्रोक, mini-stroke) हो सकते हैं जिन का असर 24 घंटे या कम में चला जाता है
    • अकसर लोग ऐसे मिनी-स्ट्रोक पहचान नहीं पाते, या उन्हें गंभीर नहीं समझते
    • पर कभी-कभी इन से मस्तिष्क में हानि हो सकती है
    • ऐसे कई मिनी-स्ट्रोक के बाद कुल मिला कर हुई हानि इतनी हो सकती है कि डिमेंशिया के लक्षण नज़र आने लगते हैं
  • मिनी-स्ट्रोक और उस में पाए डिमेंशिया से संबंधित कुछ शब्द:
    • मिनी-स्ट्रोक: ट्रांसिऐंट इस्कीमिक अटैक्स (transient ischemic attack, TIA) या अस्थायी स्थानिक अरक्तता
    • मस्तिष्क में हुई हानि: इनफार्क्ट (रोधगलितांश, infarct)
    • बार-बार के मिनी-स्ट्रोक से संबंधित डिमेंशिया: मल्टी- इनफार्क्ट डिमेंशिया (multi-infarct dementia), बहु-रोधगलितांश डिमेंशिया

[ऊपर]

सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया (Subcortical Vascular Dementia)

  • मस्तिष्क में कई छोटी वाहिकाएं हैं जो गहरे भागों (श्वेत पदार्थ) में खून पहुंचाती हैं
  • इन में भी हानि हो सकती है, जैसे कि इनका सिकुड़ जाना, अकड़ जाना, इत्यादि। ऐसे में इन में खून का बहाव ठीक नहीं रहता
    • ऐसे नुकसान के कारक रोगों में उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, और  मधुमेह शामिल हैं
  • मस्तिष्क के गहरे भागों की छोटी वाहिकाओं में हानि के कारण उत्पन्न डिमेंशिया का नाम है सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया (Subcortical vascular dementia)

[ऊपर]

संवहनी डिमेंशिया के लक्षण (Symptoms of Vascular Dementia)

  • संवहनी डिमेंशिया में शुरू के आम लक्षण हैं: शारीरिक कमजोरी और मनोदशा (मूड) में अस्थिरता/ उतार-चढ़ाव (mood fluctuations)
  • याददाश्त की दिक्कत भी हो सकती हैं, पर यह इतनी नहीं हैं जितनी कि अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s Disease) में
  • अन्य लक्षण के उदाहरण : काम करने की, या सोचने की गति कम होना, ध्यान लगाने में दिक्कत, निर्णय लेने में या समस्या का हल ढूंढ़ने में दिक्कत, भाषा संबंधी दिक्कत, भ्रम, अवसाद
  • स्ट्रोक के केस में शरीर के एक तरफ कमजोरी भी हो सकती है
  • हर व्यक्ति के लक्षण मस्तिष्क में हुई हानि के स्थान पर निर्भर हैं
संवहनी डिमेंशिया में व्यक्ति के लक्षण इस बात पर निर्भर होते हैं कि मस्तिष्क के किस-किस भाग में क्षति हुई है, और यह क्षति कितनी गंभीर है
symptoms depend on damage location

[ऊपर]

संवहनी डिमेंशिया में लक्षणों का बढ़ना (Progression of Vascular Dementia Symptoms)

  • डिमेंशिया का होना और लक्षणों की प्रगति इस पर निर्भर है कि मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में समस्या किस तरह बढ़ती है
  • डिमेंशिया का शुरू होना:
    • कुछ लोगों में संवहनी डिमेंशिया के लक्षण धीरे-धीरे नज़र आते हैं
    • पर यदि व्यक्ति को स्ट्रोक हो, तो स्ट्रोक के बाद लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं
  • लक्षण का बढ़ना भी अलग-अलग तरह से हो सकता है:
    • अगर डिमेंशिया स्ट्रोक के कारण हुआ है तो आगे के स्ट्रोक रोक पाने से मस्तिष्क में और अधिक क्षति नहीं होगी और लक्षण बिगड़ेंगे नहीं। पर अगर एक और स्ट्रोक हो जाए, तो लक्षण अचानक बढ़ भी सकते हैं । यानि कि, लक्षण चरणों (स्टेप्स) में बदतर हो सकते हैं
    • अगर व्यक्ति को बार-बार स्ट्रोक मिनी स्ट्रोक हो रहे हैं या मस्तिष्क की कोशिकाएं लगातार नष्ट हो रही हों तो गिरावट भी धीरे-धीरे बढ़ती रहेंगे
    • सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया में लक्षण धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं, या भागों में भी बढ़ सकते हैं।

[ऊपर]

संवहनी डिमेंशिया: उपचार (Treatment of Vascular Dementia)

stethescope
  • संवहनी डिमेंशिया में मस्तिष्क में हुई हानि दवाई से ठीक नहीं हो सकती (जिन भागों में हानि हुई है वे फिर से सामान्य नहीं हो सकते)
  • पर हम इस डिमेंशिया के बिगड़ने को रोकने की या धीरे करने की कोशिश कर सकते हैं—यह कोशिश कर सकते हैं कि रक्त का प्रवाह ठीक बना रहे और रक्त वाहिकाएं और अधिक खराब न हों
  • डॉक्टर सलाह और दवाई देते समय अन्य पहलुओं के साथ-साथ संवहन-संबंधी पहलुओं पर जोर देते है। उदाहरण:
    • उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, दिल की समस्याएँ : इनसे बचें या इन्हें नियंत्रित रखें
    • जीवन शैली बदलें: धूम्रपान बंद करें, व्यायाम करें, पौष्टिक भोजन लें, वज़न स्वस्थ सीमाओं में रखें, मद्यपान कम करें
  • देखभाल के समय भी इन बातों पर विशेष ध्यान देना होता है
  • यह भी जरूरी है कि स्ट्रोक के बाद खास तौर से सतर्क रहें कि और स्ट्रोक न हो, और डिमेंशिया के लक्षणों के लिए भी सतर्क रहें.

(नोट:अधिकांश डिमेंशिया में लक्षण धीरे-धीरे और लगातार बढ़ते हैं)

[ऊपर]

संवहनी डिमेंशिया: मुख्य बिंदु (Salient Points of Vascular Dementia)

mantra image
  • संवहनी मनोभ्रंश एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है, जो डिमेंशिया के 20-30% केस के लिए जिम्मेदार है
    • यह अकेले भी पाया जाता है, और अन्य डिमेंशिया के साथ भी मौजूद हो सकता है (जैसे कि अल्ज़ाइमर और लुई बॉडी डिमेंशिया के साथ)
  • लक्षणों में, और प्रगति संबंधी पहलू में यह अन्य प्रमुख डिमेंशिया से कई तरह से फर्क हैं
    • हानि कहाँ और कितनी हुई है, लक्षण इस पर निर्भर हैं
    • अल्ज़ाइमर के मुकाबले इसमें याददाश्त की समस्या शुरू में कम पाई जाती है
    • लक्षणों की प्रगति धीरे-धीरे भी हो सकती है, या चरणों (स्टेप्स) में भी हो सकती है
  • इस की संभावना कम करने के लिए कारगर उपाय मौजूद हैं
    • स्वास्थ्य और जीवन शैली पर ध्यान दें तो रक्त वाहिकाओं में समस्याएं कम होंगी. इससे संवहनी  डिमेंशिया की संभावना कम होगी, और यदि हो भी तो इसकी प्रगति धीमी कर सकते हैं
    • हृदय स्वास्थ्य के लिए जो कदम उपयोगी है, वे रक्त वाहिका समस्याओं से बचने के लिए भी उपयोगी हैं

[ऊपर]


(नोट्स: अधिक जानकारी के लिए लिंक, और चित्रों के लिए श्रेय) (Notes: Links, Credits)

*1अन्य प्रमुख डिमेंशिया और उन पर प्रकाशित पोस्ट: अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease, AD) (सबसे आम डिमेंशिया रोग), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia) और और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia, FTD)

और देखें: हिंदी वेबसाइट पर इस विषय पर पृष्ठ: डिमेंशिया किन रोगों के कारण होता है (Diseases that cause dementia),निदान, उपचार, बचाव (Dementia Diagnosis, Treatment, Prevention)
कुछ विश्वसनीय अंग्रेज़ी वेबसाइट के लिंक: Vascular Dementia (Alzheimer’s Association, USA) और Vascular Dementia (Alzheimer’s Society, UK) (अंग्रेज़ी PDF डाउनलोड उपलब्ध)

संवहनी डिमेंशिया और संबंधित विकारों के लिए कुछ शब्द/ वर्तनी:

  • वास्कुलर डिमेंशिया, वैस्क्युलर डिमेंशिया, नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया, संवहनी मनोभ्रंश, हृदवाहिनी रोग, रक्त-वाहिका रोग,स्ट्रोक, सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया, मल्टी-इनफार्क्ट, मिनी-स्ट्रोक्स, बहु-रोधगलितांश डिमेंशिया, बिंसवान्गर रोग, सबकोर्टिकल वैस्क्युलर डिमेंशिया, ट्रांसिऐंट इस्कीमिक अटैक्स, अस्थायी स्थानिक अरक्तता दौरे, पक्षाघात
  • Vascular dementia, stroke, transient ischemic attacks (TIA), multi-infarct disease, subcortical vascular dementia, small vessel disease, Binswager Disease
श्रेय: (Public domain pictures) मस्तिष्क का चित्र: Henry Vandyke Carter [Public domain], via Wikimedia Commons, मस्तिष्क के वैस्क्यूलर सिस्टम का चित्र: National Institute of Aging

[ऊपर]

ब्लॉग एंट्री शेयर करने के लिए नीचे दिए बटन का इस्तेमाल करें. आपके कमेंट भी आमंत्रित हैं. धन्यवाद!

भारत में डिमेंशिया, 2015: परिवारों की मदद कैसे करें (एक चित्रण)

पिछले कुछ ब्लॉग पोस्ट से स्पष्ट है कि जिन परिवारों में किसी को डिमेंशिया है, उन्हें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. परन्तु भारत में डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के बारे में जागरूकता कम है, और जरूरी सहायता और सेवाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं. समय पर रोग निदान नहीं हो पाता, और कई साल लंबे इस डिमेंशिया के सफर में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों और उनकी देखभाल कर रहे परिवार वालों की मदद कैसे करें?

भारत में डिमेंशिया संबंधी नीति और कार्यक्रमों की जरूरत है. उपयुक्त देखभाल प्रणाली बननी चाहिए, जो परिवार वाले अपना सकें. दवाओं के लिए शोध होना चाहिए. निधान और सपोर्ट करने वाले विशेषज्ञों की संख्या कम है; शिक्षा और प्रशिक्षण द्वारा यह क्षमता बढ़ानी होगी. समाज में डिमेंशिया जागरूकता और जानकारी बढ़नी चाहिए. सेवाओं को उपलब्ध कराना होगा. परिवारों को सलाह और सहायता मिलनी चाहिए. इन सब क्षेत्रों में सरकार, विशेषज्ञ, स्वयंसेवक, निजी कंपनी, गैर सरकारी संगठन वाले, इत्यादि, योगदान कर सकते हैं और परिवार वालों का काम कम कर सकते हैं.

आम आदमी भी छोटे और बड़े कामों से परिवार वालों की स्थिति में सुधार ला सकते हैं. हम सब योगदान कर सकते हैं. आस पास के लोगों में लक्षणों के प्रति सतर्क रह सकते हैं, जागरूकता फैला सकते हैं. समाज को डिमेंशिया-फ्रेंडली (dementia-friendly community)बनाने में योगदान कर सकते हैं. डिमेंशिया वाले परिवारों के प्रति संवेदनशील रह सकते हैं, और अपनी हिम्मत के अनुसार उनके छोटे-बड़े काम बाँट सकते हैं. हम उनके तनाव और डिप्रेशन में उनके साथ रह सकते हैं, और उन्हें भावनात्मक सपोर्ट दे सकते हैं. हम किसी डिमेंशिया-संबंधी संस्था से संपर्क करके अपना समय, कौशल और पैसे भी दे सकते हैं. हम शोध और सर्वे में भी भाग ले सकते हैं.

हम सब डिमेंशिया वाले परिवारों की मदद कैसे कर सकते हैं, इस पर कुछ सुझावों का चित्रण नीचे देखें. यह चित्र एक चार-भाग वाले इन्फोग्राफिक का चौथा भाग है.

dementia-india-2015-infographic-act-now-hindi
ब्लॉग पोस्ट से संबंधित कुछ लिंक

ब्लॉग एंट्री शेयर करने के लिए नीचे दिए बटन का इस्तेमाल करें. आपके कमेंट भी आमंत्रित हैं. धन्यवाद!

भारत में डिमेंशिया, 2015: भविष्य के लिए अनुमान

समय के साथ साथ भारत में डिमेंशिया (मनोभ्रंश) से ग्रस्त लोगों की संख्या बढ़ रही है और परिवारों पर डिमेंशिया और सम्बंधित देखभाल का असर भी बढ़ रहा है.

भारत में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है. लोग दीर्घायु हो रहे हैं. 1950-55 में जन्म पर जीवन प्रत्याशा सिर्फ 36.62 साल थी, पर 2010-2015 में यह बढ़कर 67.47 हो गयी है और अनुमान है कि 2045-2040 तक यह 75.87 साल होगी. नतीजतन, कुल आबादी में 60+ आयु वाले लोगों का प्रतिशत भी बढ़ेगा. 2015 में यह 8.9% है, और अनुमान है कि 2050 में यह अनुपात 19.4% हो जाएगा. यह इतना बड़ा फर्क है कि अपने चारों तरफ देखने से स्पष्ट होगा कि आबादी में वृद्ध लोग ज्यादा हैं. कुछ लोग इस तथ्य को “India is greying” या “India is ageing” कह कर व्यक्त करते हैं (“भारत बूढ़ा हो रहा है”).

उम्र बढ़ने पर डिमेंशिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है. हर 6.6 साल उम्र बढ़ने से डिमेंशिया का खतरा दुगना हो जाता है. 60 साल से कम उम्र के लोगों में डिमेंशिया बहुत ही कम पाया जाता है. आयु वर्ग 60-65 में 1.9% लोगों में डिमेंशिया पाया जाता है, पर 85-89 आयु वर्ग में अनुमान है कि 23% लोगों को डिमेंशिया होता है, और 90+ आयु वर्ग में तो यह 44.1% है.

दोनों बातों को जोड़ें तो स्थिति की गंभीरता और स्पष्ट नज़र आने लगती है. हमारी आबादी में वृद्ध लोगों की संख्या और अनुपात बढ़ रहे हैं, और वृद्ध लोगों को डिमेंशिया होने का ज्यादा खतरा है. वर्ष 2050 के लिए अनुमान है कि डिमेंशिया से ग्रस्त लोग तकरीबन 133.3 लाख होंगे, जो वर्तमान के मुकाबले 225% की वृद्धि है. इसके मुकाबले कुल आबादी सिर्फ 30% बढ़ेगी. यानि कि अधिक परिवारों में डिमेंशिया वाले व्यक्ति होंगे, और डिमेंशिया संबंधी सहायता और सेवाओं की जरूरत बहुत बढ़ेगी.

भविष्य में भारत में डिमेंशिया कितना अधिक होगा, इसका चित्रण नीचे देखें. यह चित्र एक चार-भाग वाले इन्फोग्राफिक का तीसरा भाग है.

dementia-india-2015-infographic-future-estimates-hindi

ब्लॉग पोस्ट से संबंधित कुछ लिंक

ब्लॉग एंट्री शेयर करने के लिए नीचे दिए बटन का इस्तेमाल करें. आपके कमेंट भी आमंत्रित हैं. धन्यवाद!

भारत में डिमेंशिया, 2015: देखभाल की चुनौतियाँ (एक चित्रण)

भारत में डिमेंशिया (मनोभ्रंश) से ग्रस्त व्यक्ति की देखभाल का काम अधिकाँश केस में उस व्यक्ति के परिवार वाले संभालते हैं.

डिमेंशिया का सफर कई साल चलता है. इस दौरान व्यक्ति की क्षमताएं घटती जाती हैं, और निर्भरता बढ़ती जाती है. शुरू में तो ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती, पर व्यक्ति का हाल बिगड़ता रहता है और समय के साथ साथ अधिक सतर्कता और मदद की जरूरत होने लगती है.

देखभाल करने में अनेक प्रकार की दिक्कतें होती हैं. देखभाल के लिए अधिक पैसे और समय की जरूरत होने लगती है. पर देखभाल कैसे करें, इसके लिए क्या प्लान करें, आगे क्या क्या हो सकता है, इस सब को समझने के लिए जरूरी जानकारी नहीं मिल पाती. सेवाएँ और सहायता भी नहीं उपलब्ध हैं. देखभाल करने वाले अकेले पड़ जाते हैं, थक जाते हैं, आर्थिक समस्याओं का सामना करते हैं, और समाज की निंदा भी सहते हैं. अनेक देखभाल करने वाले डिप्रेशन और तनाव से ग्रस्त होते हैं.

भारत में डिमेंशिया देखभाल की सच्चाइयों का एक चित्रण नीचे पेश है. इसमें भारत में देखभाल की स्थिति और चुनौतियों को दिखाया गया है. यह चित्र एक चार-भाग वाले इन्फोग्राफिक का दूसरा भाग है.

नीचे देखें: भारत में डिमेंशिया देखभाल की चुनौतियाँ:

dementia-india-2015-infographic-care-challenges-hindi

ब्लॉग पोस्ट से संबंधित कुछ लिंक

ब्लॉग एंट्री शेयर करने के लिए नीचे दिए बटन का इस्तेमाल करें. आपके कमेंट भी आमंत्रित हैं. धन्यवाद!