Is dementia something new? पहले तो डिमेंशिया/ मनोभ्रंश का नाम नहीं सुना: क्या यह नई बीमारी है?

आजकल डिमेंशिया (मनोभ्रंश)और अल्ज़ाइमर और अन्य ऐसे विषयों पर चर्चा होती है. कुछ लेखों में डरावने आँकड़े देखने को मिलते हैं, और डिमेंशिया को एक महामारी का लेबल दिया जाता है.

पर आप शायद सोच रहे होंगे कि आपने डिमेंशिया या मनोभ्रंश का नाम तो कुछ साल पहले तक नहीं सुना था, यह अचानक इतना शोर क्यों? क्या यह नई बीमारी है? या पहले भी थी, पर अब अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गयी है?

इस प्रश्न पर चर्चा करने से पहले यह जानना जरूरी है कि डिमेंशिया किसी विशेष बीमारी का नाम नहीं है. यह एक ऐसे लक्षणों के समूह (संलक्षण, syndrome) का नाम है, जो सोचने-समझने और काम करने की क्षमता में कमी होने से संबंधित है और जिनके कारण व्यक्ति को अपने दैनिक काम करने में सामान्य लोगों से कहीं ज्यादा दिक्कत हो रही है. ये लक्षण किसी रोग द्वारा मस्तिष्क में हुई हानि है के कारण होते हैं (रोगों के उदाहरण: अल्ज़ाइमर, नाड़ी सम्बंधी, लुई बाड़िज़ वाला डिमेंशिया, इत्यादि). डिमेंशिया का निदान डॉक्टर उपयुक्त जाँच के बाद ही तय करते हैं.

डिमेंशिया/ मनोभ्रंश का नाम आपने पहले भले ही न सुना हो, पर इस लक्षणों के समूह को आपने जरूर देखा होगा. जैसे कि कोई बुज़ुर्ग भटक जाते हैं, उन्हें घर का अता पता नहीं याद रहता, और कोई पड़ोसी पहचान के उन्हें वापस लाता है. या कोई वृद्ध महिला कहती हैं कि नौकरानी ने मेरी सोने के कंगन चुरा लिए हैं, जबकि उन्होंने कंगन दस साल पिघलवा कर दूसरे जेवर बनवाए थे. या कोई व्यक्ति अपने पोता पोती का नाम भूल गए हैं, यह भी भूल गए हैं कि उनके पोता पोती हैं. या भूल जाते हैं कि वे रिटायर हो चुके हैं.

सदियों से हम ऐसे लक्षणों को अनेक रूपों में देखते आ रहे हैं. इस प्रकार के कई व्यवहार को लोग टाल यह कह कर देते हैं कि “बूढ़े हो गए हैं, दिमाग ठीक नहीं रहा” या “सठिया गए हैं.” या वे गुस्सा करते हैं कि यह व्यक्ति तो अब पागल हैं. या कहते हैं कि व्यक्ति कोशिश नहीं करते, मतलबी हैं, हमें परेशान करने में इन्हें मजा आता है. इनका स्वभाव रूखा हो गया है. कभी कभी कह देते हैं कि उनका चरित्र बिगड़ गया है.

अब डॉक्टर यह समझ पाए हैं कि कुछ ऐसे रोग हैं जिनसे मस्तिष्क में हानि होती है, और इस हानि की वजह से ऐसे लक्षण पेश हो सकते हैं. यानि कि, यह संभव है कि कई व्यक्तियों में ये लक्षण रोग से उत्पन्न हुए मस्तिष्क में हुई हानि के कारण हैं, न कि व्यक्ति की नकारात्मक सोच के कारण. अब शोधकर्ता डिमेंशिया के लक्षण पैदा करने वाली बीमारियों के लिए दवाई बनाने की कोशिश में लगे हैं.

यूं कहिये कि ऐसे अजीबोगरीब लक्षण तो सदियों पुरानी समस्या है, पर ये किसी शारीरिक परिवर्तन के कारण हो सकते है, यह कुछ दशक पहले ही पहचाना गया हैं. डॉक्टर से सलाह करके हम अब जान सकते हैं कि हमारे प्रियजन में दिख रहे ये लक्षण क्या किसी बीमारी की वजह से हैं..

यह भी गौर करें कि, क्योंकि अब हम समझ गए हैं कि इस अवस्था का कारण एक शारीरिक कारण हो सकता है–मस्तिष्क की हानि–इसलिए बदले व्यवहार को देखते ही उनके लिए पुराने शब्दों का इस्तेमाल गलत है. वे शब्द सिर्फ व्यवहार पर केंद्रित थे, नकारात्मक थे, हल/ इलाज की संभावना नहीं पहचानते थे, और व्यक्ति को कलंकित और अपमानित करते थे.

ऐसे लक्षण प्रकट होने पर डॉक्टर से सलाह करें, और डॉक्टर जाँच करके बताएँगे कि क्या व्यक्ति की स्थिति को डिमेंशिया कहा जा सकता है. डिमेंशिया के निदान से, और उचित शब्द के इस्तेमाल से यह स्पष्ट रहेगा है कि ये लक्षण रोग के कारण हैं–व्यक्ति आलस या लापरवाही नहीं दिखा रहे, और उन्हें पागल कहना अन्याय है.

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