Dementia memory loss examples डिमेंशिया में भूलने के कुछ उदाहरण

उम्र के साथ याददाश्त में और काम करने की क्षमता में कुछ कमी होना स्वाभाविक है, पर डिमेंशिया के लक्षण इन सामान्य प्रॉब्लम से अलग हैं. याददाश्त की समस्याओं को ही लीजिए. कुछ उदाहरण देखें.

मान लीजिए कि आप पापा और पूरे परिवार के साथ कुछ साल पहले एक शादी पर मुम्बई गए थे, और आपने वहाँ एक पूरा महीना बिताया था. सामान्य बुज़ुर्ग शायद यह भूल जाएँ कि कितने साल पहले गए थे या किस महीने में गए थे, और कोलाबा की सैर उस ट्रिप में करी थी या उससे पहले वाले मुम्बई के ट्रिप में. पर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति यह भी भूल सकते हैं कि वे किसी शादी में मुम्बई गए थे, या उन्होंने मुम्बई शहर देखा हुआ है या नहीं. यानि कि, किसी बड़ी घटना का एक हिस्सा भूल जाना सामान्य है, पर उसे पूरी तरह भूल जाना किसी समस्या का परिचायक है.

आम-तौर पर यदि हम कुछ भूल भी रहे हों तो याद दिलाने पर, या समझाने पर, हमें बात याद आ जाती है, पर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को याद दिलाने पर भी अक्सर बात नहीं याद आती.

या वस्तुओं के उपयोग करने को लीजिए. वस्तु किस काम के लिए है, और उसका उपयोग कैसे करें, यह भी याददाश्त पर निर्भर है. रोज काम आने वाली वस्तु के इस्तेमाल में पहले के मुकाबले कुछ धीरे पड़ जाना तो उम्र के साथ हो सकता है. पर ऐसा सामान्य नहीं है कि व्यक्ति यही भूल जाएँ कि वो वस्तु किस काम के लिए है.

अगर व्यक्ति चाबी देखकर कुछ चकराए हुए लगें, चाबी को ऐसे टटोलें जैसे कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि इस वस्तु को कैसे पकड़ते हैं और किस काम के लिए इस्तेमाल करें, तो यह व्यवहार सामान्य बुढ़ापे का अंग नहीं है. शुरूआती अवस्था में ऐसा कन्फ्यूज़न कुछ पल होता है, फिर चला जाता है, या व्यक्ति उसे छुपा पाते हैं. रोग के बढ़ने पर यह कन्फ्यूज़न बढ़ता है और पास वालों को स्पष्ट नज़र आने लगता है

डिमेंशिया / मनोभ्रंश का भूलना सामान्य भूलने से फ़र्क है

सामान्य भूलने में और डिमेंशिया के भूलने में फर्क पर कुछ अन्य उदाहरण:

यह भूल जाना सामान्य है कि आज कौन सा वार है. परन्तु यह भूल जाना कि दस मिनट पहले नाश्ता करा था और फिर दुबारा नाश्ता माँगना, इस तरह का भूलना समस्या का बोधक है. अनजान शहर में रास्ता खोना साधारण बात है. पर परिचित जगह में कन्फ्यूज़ होना सामान्य नहीं है, जैसे कि अपने ही घर में यह भूल जाना कि गुसलखाना किधर है. दूर की जान-पहचान वाले को न पहचान पाना एक बात है, पर डिमेंशिया में तो व्यक्ति अपने ही बीवी-बच्चों के नाम भूल जाते हैं या उन्हें पहचान नहीं पाते. वे यही भूल सकते हैं कि वे रिटायर हो चुके हैं, या उनकी कभी शादी हुई थी. इस तरह के महत्त्व-पूर्ण बातों को भूलना सामान्य बुढ़ापे का अंग नहीं है.

डिमेंशिया की अग्रिम अवस्था में तो व्यक्ति अपना नाम और पहचान भी भूल जाते हैं. इस स्थिति तक पहुंचने पर तो यह सभी को स्पष्ट नज़र आने लगता है कि व्यक्ति सामान्य बुजुर्गों जैसे नहीं है. हम कितने भी बूढ़े क्यों न हों, यह कल्पना करना मुश्किल है कि हम अपना ही नाम भूल जायेंगे!

यह गौर करें कि डिमेंशिया की समस्याएं अचानक, रातों-रात नहीं होतीं. ये धीरे धीरे बढ़ती हैं. शुरू में ये छोटी, मामूली बातों में दिखाई देती हैं और तुच्छ लगती हैं, और परिवार वाले इनको नजरअंदाज कर देते हैं. शुरू में व्यक्ति भी अपनी समस्याओं को छुपा लेते हैं. शायद उन्हें डर लगता हो कि लोग उन पर हसेंगे या उन्हें पागल कहेंगे. जैसे जैसे स्थिति बदतर होती है, यह छुपाना मुश्किल होने लगता है. बाहर वालों के सामने तो वे सामान्य व्यवहार कर पाते हैं, पर घर पर, चौबीसों घंटे साथ रहने वालों को लगने लगता है कि कुछ ग्रिड है. यदि परिवार वाले सतर्क रहें तो पहचान पायेंगे कि क्या भूलना सामान्य किस्म का है या गंभीर समस्या का सूचक हो सकता है. वे फिर डॉक्टर से सलाह करके उचित निदान पा सकते हैं. (वैसे भी, अगर शक हो कि शायद समस्या डिमेंशिया जैसे है, तो सलाह लेना अच्छा होगा)

इस पर और कुछ जुड़े हुए उपयोगी विषयों पर आप चर्चा और लिंक इस पृष्ठ पर देख सकते हैं: डिमेंशिया क्या है.

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