Memories of mother’s early dementia: डिमेंशिया के शुरू के दिन और माँ की याददाश्त की प्रॉब्लम

कुछ दिन पहले, याददाश्त के बारे में लिखते हुए, मुझे बहुत साल पहले की कुछ घटनाएं यकायक याद आ गयीं. ये उस समय की हैं जब माँ को डिमेंशिया का निदान नहीं मिला था, पर हमने डॉक्टर के चक्कर काटने शुरू कर दिए थे क्योंकि माँ कभी कभी शिकायत करती थीं कि उन्हें याददाश्त में कुछ प्रॉब्लम है. पर कई बार वे इस बात से साफ मुकर जाती थीं कि कुछ गड़बड़ है–कहती थीं कि मुझे तो कुछ नहीं हुआ है, तुम लोग मुझे पागल कर रहे हो.

एक दिन हम कुछ बात कर रहे थे और मैंने किसी पुरानी, इम्पोर्टेन्ट घटना का जिक्र करा. माँ मुझे ऐसे ताकने लगीं जैसे कि मैंने कोई बहुत ही अटपटी बात कही हो. मैंने पूछा, याद नहीं क्या? उन्होंने कहा, नहीं. बस फिर क्या था, मैं उनकी याद ताजा करने कि लिए उस घटना के आगे-पीछे की घटनाओं का ताँता बाँधने लगी. घटना को भी विस्तार में बताने लगी. भला ऐसे भी कोई भूल सकता है!

पर मेरी काफी कोशिश के बाद भी माँ यही कहती रहें, नहीं, ऐसा तो कुछ नहीं हुआ था, तुम्हें जरूर गलतफहमी हो रही है.

जब मैं फिर भी उन्हें याद दिलाने की कोशिश में लगी रही, तो वे बौखला गयीं. बोलीं: जब मुझे ऐसा कुछ भी याद नहीं, तो मैं तुम्हारे कहने पर कैसे यकीन कर लूं? मैं अपनी यादों पर यकीन करूँ, अपने ऊपर यकीन करूं, या कि किसी दूसरे की बातों पर? तुम्हारी याद कुछ गड़बड़ा रही होगी. पता नहीं तुम मेरे पीछे क्यों पड़ी हो!

मैं चुप हो गयी. मेरे पास उनके इस तर्क के लिए कोई प्रत्युत्तर नहीं था. सच ही तो है, इंसान अपनी यादों के ऊपर यकीन न करके किसी और पर यकीन करे, यह तो बेवकूफी लगती है.

एक अन्य वाकया, यह भी निदान से पहले के दिनों का.

माँ को बाजार से कुछ पसंदीदा नमकीन मंगवाना था. उन्होंने मुझसे कहा, और मैंने कहा, ठीक है, ले आऊँगी. कुछ मिनट बाद उन्होंने अपनी बात दोहराई, और मैंने फिर कहा, हाँ, जरूर ले आऊँगी. फिर कुछ मिनट बाद उन्होंने फरमाइश दोहराई. मैंने फिर हामी भर दी.पर जब यह अगले एक घंटे में छह बार फिर से हुआ, तो मैं चिड़चिड़ा कर बोली, आप और कितनी बार यह बात दोहराएँगी, मैंने कह तो दिया ले आऊँगी.

इस पर वे उत्तेजित हो गयीं.

बोलीं, मैंने तो तुम से इसके बारे में पहले नहीं कहा था. तुम झूठ बोल रही हो. और तुम मुझ से ऐसी आवाज़ में कैसे बोल सकती हो, तमीज नहीं क्या?

मैं फिर चुप, परेशान. सोचने लगी, ऐसे कैसे हो सकता है कि एक घंटे में इतनी बार एक ही बात की रट लगाने के बाद भी उन्हें यह याद नहीं कि वे मुझसे नमकीन लाने को कह चुकी हैं? फिर सोचा, यदि सचमुच उनको इस तरह की प्रॉब्लम है तब तो वे क्या भूलेंगी, क्या नहीं, यह मुझे कैसे पता चलेगा? मैं क्या करूँ?

मैं उन दिनों यह नहीं जानती थी कि ऐसा ‌‍किस्से तो एक लम्बी देखभाल के सिलसिले की शुरूआत के सूचक हैं. फिर माँ का निदान हुआ, डिमेंशिया के बारे में मेरी समझ बढ़ी, और उस समझ के साथ ऐसी स्थिति से जूझने के लिए सब्र भी बढ़ा, और तरीके भी सीखे…

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2 thoughts on “Memories of mother’s early dementia: डिमेंशिया के शुरू के दिन और माँ की याददाश्त की प्रॉब्लम

    1. Swapna Kishore Post author

      माँ का डिमेंशिया बढ़ता गया, और आखिरी अवस्था में वे ढाई साल पूरी तरह लाचार, बिस्तर पर थीं. मेरे अंग्रेज़ी ब्लॉग पर उनकी देखभाल के कई किस्से हैं: http://swapnawrites.wordpress.com

      ऐसा कोई इलाज नहीं है जिससे डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति फिर से पूरी तरह से सामान्य हो सके. कुछ इलाज ऐसे हैं जिनसे कुछ रोगियों में कुछ समय के लिए लक्षणों में कुछ राहत मिलती है, पर यह राहत सिर्फ कुछ टाइम के लिए होती है. रोग फिर भी बढ़ता रहता है और अंतिम समय में रोगी पूरी तरह से लाचार हो जाता है.

      क्या डॉक्टर ने जांच के बाद आपकी माँ को डिमेंशिया का निदान दिया है? फिर उनसे इलाज के बारे में पूछें. यह याद रखें कि यदि सचमुच डिमेंशिया है, तो पूरी तरह ठीक नहीं होगा. पर यदि उनके लक्षण किसी अन्य रोग के कारण हैं, तो शायद इलाज से ठीक हो जाएँ, इसलिए ढंग का निदान करवाना बहुत ज़रूरी है.

      आप मेरा हिंदी वेबसाइट देख सकते हैं; वहाँ विस्तार में चर्चा है. http://dementiahindi.com

      My mother’s dementia became worse and she spent her last 2.5 years fully dependent and bedridden. There is no treatment for dementia that would make a patient normal again. Some medicines can give some relief from the symptoms to some patients for some time, but nothing stops the underlying disease which will get worse with time.

      Has your mother been diagnosed with dementia by a reliable specialist? Then you need to discuss the various treatment options with the doctor. But if it is dementia, then getting back fully to normal is not possible. So a proper diagnosis is a must, because if the symptoms are because of some other disease, maybe there will be medicine.

      There are also discussions on multiple topics of this sort on the English website at http://dementia-care-notes.in

      As you are in Delhi, you can also contact ARDSI Delhi Chapter for information (contact information here: http://dementia-care-notes.in/resources/city-wise/dementia-delhi/ )

      You can also contact me by email using the contact forms on any of the sites if you have more questions.

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