Early dementia symptoms are difficult to recognize शुरू में डिमेंशिया के लक्षण पहचानना मुश्किल है

डिमेंशिया रातों-रात नहीं होता. शुरू में लक्षण मंद होते हैं, पहचाने नहीं जाते. व्यक्ति को अगर कुछ दिक्कत हो भी, तो वे दिक्कत को छुपा लेते हैं, शायद शर्म की वजह से, यह सोचकर कि लोग उन्हें पागल या हीन समझेंगे. अगर आस-पास वालों को लगता है कि व्यक्ति पहले से कुछ ज्यादा भूल रहे हैं या उनके व्यक्तित्व में कुछ बदलाव है, तो वे इस बदलाव को उम्र का स्वाभाविक असर सोच कर नजरअंदाज कर देते हैं.

शुरू में होती छोटी छोटी गलतियाँ छुपाना आसान है. किसी ने कुछ पूछा तो बात बदलकर या वापस पलट कर प्रश्न पूछने से बात आई गई सी हो जाती है. कोई गलती हो जाए और कोई कहे, यह क्या किया, तो पलट कर व्यक्ति गुस्सा दिखा देते हैं और दूसरे लोग चुप हो जाते हैं. लोग सोचते हैं, भई उम्र बढ़ रही है, कुछ तो फर्क होगा ही.

मेरा अपना अनुभव यह रहा कि कई साल तक माँ बाहर वालों के सामने अपनी दिक्कतों को छुपा पाती थीं. जैसे कि, जब माँ से कोई पूछता था, मुझे पहचाना नहीं? तो नहीं पहचानने पर भी वे कहती थीं, हाँ हाँ, क्यों नहीं! जरूर पहचानती हूँ! और फिर पूछ लेती थीं, और सब कैसे चल रहा है, घर पर सब ठीक है? या कहती थीं, चाय पियेंगी क्या? बात बदल जाती थी.

प्रारंभिक लक्षण अक्सर मंद होते हैं. वे कभी कभी नज़र आते हैं, और कभी कभी सब सामान्य लगता है. डॉक्टर से सलाह करना न तो व्यक्ति को सूझता है और न ही परिवार वालों को. और अगर कोई डॉक्टर से कह भी दें कि डॉक्टर, भूलना कुछ बढ़ गया है, कन्फ्यूज़न भी रहने लगा है, तो डॉक्टर भी इतना ध्यान नहीं देते. टालते हुए कह देते हैं, उम्र के साथ तो यह कुछ कुछ लगा रहता है, आप सक्रिय रहिये, रोज चला कीजिये, फल-सब्जी ज्यादा खाइए, दोस्तों से मिलना बनाए रखिये, बस.

लक्षण समय के साथ बढ़ते तो हैं, पर धीरे धीरे. लोग इस बढ़ने को भी उम्र की स्वाभाविक प्रतिक्रिया समझते हैं. उम्र के बढ़ने की वजह से किसी बुज़ुर्ग की सोच-समझ में, याददाश्त में, काम करने की क्षमता में कितनी गिरावट सामान्य है, और यह गिरावट कब चिंताजनक मानी जाए, इसका न तो व्यक्ति को अंदाज़ा होता है, न परिवार वालों को.

कुछ समय बाद लक्षण इतने बढ़ जाते हैं कि साफ नज़र आता है कि व्यक्ति को दैनिक कार्यों में मुश्किल हो रही है. शायद इस समय फिक्र होने लगे, पर तब भी यह अंदाज़ा नहीं लग पाता कि यह सम्सयाएं किसी बीमारी के कारण हैं. अफ़सोस, व्यक्ति को कोई गंभीर समस्या है यह शक तो किसी बड़े हादसे के बाद ही होता है. जैसे कि व्यक्ति का घर से निकल जाना और फिर घर का रास्ता नहीं पहचान पान और खो जाना, व्यक्ति का परिवार वालों को नहीं पहचान पाना, या आक्रामक व्यवहार दिखाना. जब कुछ ऐसा होता है तो परिवार वालों को झटका लगता है. उन्हें एहसास होता है कि ऐसा व्यवहार सामान्य नहीं है, और डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए.

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