Can we protect ourselves from dementia क्या हम डिमेंशिया से सुरक्षित रह सकते हैं?

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) की डरावनी सचाई के बारे में सुनते हैं तो हम यह जानना चाहते हैं कि क्या इससे बचा जा सकता है.

अखबारों में और टीवी प्रोग्राम में हम देखते और सुनते हैं कि कुछ तरीके हैं जिनसे हम डिमेंशिया से बचे रह सकते हैं. कुछ लेखों में स्वस्थ जीवन शैली के सुझाव होते हैं, कुछ में अन्य सुझाव होते हैं. सवाल यह है कि ये उपाय हमें सुरक्षित रखने में किस हद तक कारगर हो सकते हैं.

तो संक्षेप में कुछ उत्तर:

  • क्या हम अपने जीवन में कुछ ऐसे बदलाव कर सकते हैं या कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं जो डिमेंशिया का खतरा कम करेंगे?…..हाँ!!
  • और क्या इन कदमों से हम शत-प्रतिशत डिमेंशिया से बच जायेंगे?….. नहीं, .विशेषज्ञों का ऐसा कोई दावा नहीं है.

सच तो यह है कि फिलहाल डिमेंशिया की जानकारी इतनी पक्की नहीं है कि हम यह कह पाएँ कि यह कदम उठायें तो यह निश्चित है कि डिमेंशिया नहीं होगा. जो तरीके सुझाए जाते हैं, वे डिमेंशिया पैदा होने की संभावना कम कर सकते हैं, पर हम पूरी तरह से डिमेंशिया से बचे रहेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है. वर्तमान उपलब्ध सुझाव सब Risk reduction के तरीके हैं, सम्पूर्ण सुरक्षा के (zero-risk) तरीके नहीं.

एक अन्य पहलू यह है कि डिमेंशिया के लक्षण अनेक बीमारियों के कारण पैदा हो सकते हैं. अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease) इन बीमारियों में प्रमुख है, पर डिमेंशिया पैदा करने वाली बीमारियों की संख्या तकरीबन पचास से सौ हैं. ये बीमारियों क्यों होती हैं, और इनसे कैसे बचें, ये अब भी शोध के विषय हैं.

यदि हम यह चाहें कि डिमेंशिया के सभी प्रकार से सुरक्षित रहें, तो इसका मतलब है हमें हरेक डिमेंशिया रोग से सुरक्षित रहना होगा. इसके लिए जरूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है.

विशेषज्ञों की सिफारिश है कि हम हम डिमेंशिया से बचाव के सुझाव अपनाएँ. गौर-तलब है कि डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए जो सुझाव दिए जाते हैं वे अक्सर जीवन शैली सम्बंधित हैं. उनको अपनाने से अन्य रोगों की संभावना भी कम होगी. उदाहरण: नियमित व्यायाम का सुझाव तो डॉक्टर मधुमेह (diabetes) और उच्च रक्त-चाप (high blood pressure) से बचने के लिए भी देते हैं. बढ़ती उम्र के बावजूद हम स्वस्थ, सक्रिय और खुश रह पाएँ, इसकी संभावना बढ़ाने के लिए इन बचाव के तरीकों को अपनाना अकलमंदी है.

पर एक बात का खयाल रखें….

यदि किसी को डिमेंशिया हो, तो यह न सोचें कि व्यक्ति ने अपने स्वास्थ्य का खयाल नहीं रखा होगा. डिमेंशिया का होना किसी लापरवाही का नतीजा कतई नहीं है. सच तो यह है कि डिमेंशिया क्यों होता है, किसे होता है, कब हो सकता है, इस सब की समझ अभी बहुत कच्ची और अधूरी है. उत्तम जीवन शैली अपनाने वालों को भी डिमेंशिया हो सकता है.

एक अन्य पहलू यह है कि अच्छी जीवन शैली अपनाने के बाद भी हमें डिमेंशिया के लक्षणों के प्रति सचेत रहना होगा. यदि हम डिमेंशिया के कुछ लक्षण देखें तो डॉक्टर से सलाह करना उचित होगा. यह मत सोचिये कि भई, हम तो पूरी सावधानी से जी रहे थे, हमें कुछ नहीं हो सकता. अपनी तरफ से पूरी कोशिश के बावजूद हमें डिमेंशिया हो सकता है. स्वयं को दोष न दें, न ही अपने में हो रहे बदलाव को नकारें. डॉक्टर से यथा-उचित सलाह कर.

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s