Late stage dementia care अंतिम अवस्था में डिमेंशिया देखभाल

late stage dementia patients are bedridden and fully dependent on caregivers

मेरी माँ का डिमेंशिया सफर कई सालों तक चला और आखिर के ढाई साल वे पूरी तरह बिस्तर पर ही थीं. इस अवस्था में देखभाल खासतौर पर मुश्किल होती हैं. वे चबा नहीं पाती थीं इसलिए हम उन्हें सूप, जूस, पतली दाल, छाछ देते. निगलने में दिक्कत थी इसलिए खयाल रखना होता था कि खाना पेट में ही जाए, गलती से फेफड़ों में न जाए. बेड सोर न हों इसलिए हर दो तीन घंटों में करवट बदलते थे. वे यह भी नहीं बता पाती थीं कि उन्हें क्या कहीं दर्द हो रहा है या कुछ तकलीफ है–हम इसका अंदाजा उनके हाव-भाव और शरीर हिलाने के तरीके से ही लगा पाते थे. उनको इस स्थिति में देखना बहुत मुश्किल हो जाता था.

कई देशों में इस अवस्था में देखभाल खास बनाए गए रिस्पाईट केयर (respite care) या ओल्ड एज होम (old age home) में होती है पर भारत में हम यह अंतिम चरण की देखभाल अपने घरों में ही करते हैं. देखभाल कैसे करें, इस विषय पर जानकारी आसानी से नहीं मिल पाती. क्योंकि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अपनी मर्जी बता नहीं पाते, देखभाल में अनेक चुनौतियों का सामना करना होता है. कई कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं.

इस विषय पर देखभाल करने वालों के लिए हिंदी में विस्तृत चर्चा का एक पृष्ठ: अग्रिम/ अंतिम अवस्था में देखभाल (Late-stage dementia care).


माँ की देखभाल के अंतिम चरण के मेरे निजी अनुभव मैंने विस्तार में अपने अंग्रेज़ी ब्लॉग पर इस श्रेणी में लिखे हैं: Late stage care.

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