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डिमेंशिया: एक गंभीर समस्या (सिर्फ “भूलने” की बीमारी नहीं)

अकसर लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं. वे सोचते हैं कि याददाश्त की समस्या ही डिमेंशिया का एकमात्र या प्रमुख लक्षण है. पर याददाश्त की समस्या तो डिमेंशिया के लक्षणों में से सिर्फ एक है– डिमेंशिया के अनेक गंभीर और चिंताजनक लक्षण होते हैं, जिन का डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के जीवन के हरेक पहलू पर असर होता है. व्यक्ति को अपने साधारण दैनिक कार्यों में दिक्कतें होती हैं, और ये दिक्कतें समय के साथ बढ़ती जाती हैं. सहायता की जरूरत भी बढ़ती जाती है, और देखभाल का काम मुश्किल होता जाता है.

इस हिंदी प्रेजेंटेशन में देखिये डिमेंशिया क्या है, इस में मस्तिष्क में कैसी हानि होती है, लक्षण क्या हैं, और समय के साथ क्या होता है, और यह किस किस प्रकार का हो सकता है. इस के इलाज संभव हैं या नहीं, और इस की संभावना कम करने के लिए डॉक्टर क्या सुझाव देते हैं, इस पर भी स्लाइड हैं. देखभाल करने वालों को क्या करना होता है, इस पर चर्चा देखिये. इस प्रेजेंटेशन में उदाहरण और चित्र भी हैं.

हिंदी में इसे स्लाईड शेयर (Slideshare) पर देखें — यदि प्लेयर नीचे लोड न हो रहा हो तो यहाँ क्लिक करें: डिमेंशिया क्या है?(What is Dementia)

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डिप्रेशन (अवसाद) और डिमेंशिया (Depression and Dementia)

पिछले कुछ सालों में मीडिया में डिप्रेशन पर ज्यादा खुल कर चर्चा होने लगी है, खास-तौर से दीपिका पादुकोण और करण जौहर जैसी मशहूर हस्तियों के अनुभव सुनकर. पर डिप्रेशन के एक पहलू पर अब भी चर्चा कम है — डिप्रेशन का अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से सम्बन्ध.

रिसर्च के अनुसार डिप्रेशन (अवसाद) और डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के बीच में सम्बन्ध है. यह पाया गया है कि जिन लोगों में डिप्रेशन है, उनमें (आम व्यक्तियों के मुकाबले) डिमेंशिया ज्यादा देखा जाता है. इस पोस्ट में:

डिप्रेशन के बारे में

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कई लोग किसी बुरी घटना के बाद हुई उदासी या निराशा के लिए “डिप्रेशन” शब्द का इस्तेमाल करते हैं. पर बुरी घटनाओं से उदास होना एक सामान्य प्रक्रिया है. चिकित्सीय (मेडिकल) भाषा में “डिप्रेशन (अवसाद)” एक ऐसा मानसिक विकार है जिस में उदासी, निराश, अरुचि जैसी भावनाएं कम से कम दो हफ्ते से मौजूद हैं, और जिन के कारण व्यक्ति के जीवन में बाधा होती है. इस में इलाज की जरूरत है.

डिप्रेशन (अवसाद) किसी को भी हो सकता है. डिप्रेशन में व्यक्ति उदास रहते हैं, पसंद वाली गतिविधियों में रुचि खो देते हैं, ठीक से सो नहीं पाते, ठीक से खा नहीं पाते, और थके-थके रहते हैं. उन्हें ध्यान लगाने में दिक्कत होती है. सोच नकारात्मक हो जाती है. किसी भी काम में आनंद नहीं आता. वे खुद को दोषी समझते हैं. आत्मविश्वास कम हो जाता है. रोज के साधारण काम करने का मन नहीं होता. वे सामाजिक और व्यवसाय संबंधी काम भी नहीं करना चाहते. कुछ डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति इतने निराश हो जाते हैं कि आत्महत्या करना चाहते हैं.

डिप्रेशन का प्रकरण (depressive episode, डिप्रेसिव एपिसोड) कम से कम दो हफ्ते लम्बे होता है, पर अधिक लंबा भी हो सकता है. व्यक्ति को ऐसे एपिसोड बार-बार हो सकते हैं.

डिप्रेशन के लिए इलाज उपलब्ध हैं, जैसे कि अवसाद-निरोधी दवा और अनेक प्रकार की थैरेपी और गैर-दवा वाले उपचार. और अगर डिप्रेशन किसी अन्य बीमारी के कारण हुआ है (जैसे कि थाइरोइड हॉर्मोन की कमी), तो उस बीमारी को ठीक करने से डिप्रेशन दूर हो सकता है. उचित उपचार और जीवन शैली में बदलाव से अधिकाँश लोगों को डिप्रेशन से आराम मिल पाता है और वे सामान्य जीवन बिता पाते हैं.

(डिप्रेशन पर हिंदी में कुछ और जानकारी के लिए नीचे “अधिक जानकारी के लिए रेफेरेंस और उपयोगी संसाधन” में लिंक हैं)

डिमेंशिया के बारे में

डिमेंशिया एक ऐसा लक्षणों का समूह है जिस में व्यक्ति की याददाश्त में, सोचने-समझने और तर्क करने की क्षमता में, व्यक्तित्व, मनोभाव (मूड) और व्यवहार में, बोलने में, और अनेक अन्य मस्तिष्क से संबंधी कामों में दिक्कत होती है. इन लक्षणों के कारण व्यक्ति को दैनिक कार्यों में दिक्कत होती है, और यह दिक्कत समय के साथ बढ़ती जाती है. व्यक्ति अकेले अपने काम नहीं कर पाते. दूसरों पर निर्भरता बढ़ती जाती है.

डिमेंशिया किसी को भी हो सकता है, पर बड़ी उम्र के लोगों में ज्यादा पाया जाता है. ध्यान रखें, डिमेंशिया उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया नहीं है. यह मस्तिष्क में हुई हानि के कारण होता है—जैसे कि मस्तिष्क के सेल का नष्ट होना, सेल के बीच के कनेक्शन में नुकसान, और मस्तिष्क का सिकुड़ना. ऐसे कई रोग हैं जिन में मस्तिष्क में इस तरह की हानि हो सकती है. चार रोग मुख्य हैं: अल्ज़ाइमर रोग, संवहनी डिमेंशिया, लुइ बॉडी डिमेंशिया, और फ्रंटो-टेम्पोरल डिमेंशिया. अब तक ऐसी कोई दवा उपलब्ध नहीं है जिस से मस्तिष्क की हानि ठीक हो सके. डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति फिर से सामान्य नहीं हो सकते. डिमेंशिया के अंतिम चरण तक पहुँचते-पहुँचते व्यक्ति पूरी तरह निष्क्रिय और निर्भर हो जाते हैं.

(डिमेंशिया पर हिंदी में विस्तृत जानकारी के लिए नीचे “अधिक जानकारी के लिए रेफेरेंस और उपयोगी संसाधन” में लिंक हैं)

डिप्रेशन और डिमेंशिया के बीच का सम्बन्ध

रिसर्च से यह तो पता चल पाया है कि डिमेंशिया और डिप्रेशन में सम्बन्ध है, पर यह सम्बन्ध क्या है, इस पर अभी पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है. शोध जारी है. अब तक के रिसर्च के आधार पर विशेषज्ञ मानते हैं कि डिमेंशिया और डिप्रेशन के बीच कई तरह के सम्बन्ध हैं.

डिप्रेशन डिमेंशिया का एक कारक माना जाता है.  डिप्रेशन वाले व्यक्ति में डिमेंशिया होने से संभावना ज्यादा है. कुछ विशेषज्ञों की राय है कि यह इस लिए है क्योंकि डिप्रेशन में मस्तिष्क में कई बदलाव होते हैं, और संवहनी समस्याएँ (नाड़ी संबंधी समस्याएँ) भी हो सकती हैं, और इन बदलाव के कारण डिमेंशिया की संभावना ज्यादा होती है. सब डिप्रेशन वाले लोगों को डिमेंशिया नहीं होगा, पर उन में डिमेंशिया की संभावना दूसरों के मुकाबले ज्यादा है.

डिप्रेशन को डिमेंशिया के एक लक्षण के रूप में पहचाना गया है. यह सबसे पहले प्रकट होने वाले लक्षणों में भी शामिल हो सकता है.  विशेषज्ञों के अनुसार डिमेंशिया में हुए मस्तिष्क में बदलाव के कारण जो लक्षण होते हैं, उनमें से डिप्रेशन भी एक संभव लक्षण है.  यानी कि, डिमेंशिया का एक संभव नतीजा है डिप्रेशन, और हम डिमेंशिया को डिप्रेशन का कारक समझ सकते हैं

अन्य प्रकार के सम्बन्ध: डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को कई दिक्कतें होती हैं और व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं बिता पाते. व्यक्ति अपनी कम हो रही कार्यक्षमता से बहुत मायूस हो सकते हैं, और नतीजन उन्हें डिप्रेशन हो सकता है. डिप्रेशन और डिमेंशिया के बीच अन्य प्रकार के सम्बन्ध भी संभव हैं, जिन में किसी दूसरी ही वजह से डिप्रेशन और डिमेंशिया साथ साथ नजर आ रहे हैं (सह-विद्यमान हैं, co-existing).

कोशिश करें कि डिप्रेशन के प्रति सतर्क रहें, खासकर बड़ी उम्र के लोगों में

डिप्रेशन का व्यक्ति पर बहुत गंभीर असर पड़ता है, इस लिए इस के प्रति सतर्क रहना और सही निदान और उपचार पाना जरूरी है. पर समाज में जागरूकता कम होने के कारण  लोग अक्सर इसे पहचान नहीं पाते और डॉक्टर की सलाह नहीं लेते.

वृद्ध लोगों में सही निदान की समस्या अधिक है, क्योंकि डिप्रेशन के लक्षण देखने पर परिवार वाले सोचते हैं कि व्यक्ति रिटायर हो चुके  हैं या बूढ़े हैं इस लिए गुमसुम रहते हैं और गतिविधियों में भाग नहीं लेते.

डिप्रेशन के प्रति सतर्क रहने के और जल्द-से-जल्द डॉक्टर से संपर्क करने के कई फायदे हैं:

  • यदि व्यक्ति को डिप्रेशन है, तो उपचार से फायदा हो सकता है. डिप्रेशन का इलाज संभव है, तो व्यक्ति व्यर्थ में तकलीफ क्यों सहे!
  • डिप्रेशन को पहचानने से और उचित इलाज से डिमेंशिया की संभावना कम करी जा सकती है. बड़ी उम्र के लोगों में डिप्रेशन और डिमेंशिया का सम्बन्ध खास तौर से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि डिमेंशिया का खतरा वृद्धों में ज्यादा होता है. यदि पता हो कि व्यक्ति को  डिप्रेशन है तो डॉक्टर और परिवार वाले व्यक्ति में डिमेंशिया के लक्षण के लिए ज्यादा सतर्क रह सकते हैं
  • यदि व्यक्ति को डिप्रेशन और डिमेंशिया दोनों हैं, तो डॉक्टर डिप्रेशन के उपचार के अलावा डिमेंशिया का रोग-निदान भी कर पायेंगे, और डिमेंशिया के बारे में जानकारी और सलाह भी दे पायेंगे. परिवार वाले भी व्यक्ति की स्थिति ज्यादा अच्छी तरह समझ सकते हैं और देखभाल के लिए सही इंतजाम कर सकते हैं
  • डिप्रेशन का सम्बन्ध अन्य भी कुछ बीमारियों से है, जैसे कि हृदय रोग. इस लिए डिप्रेशन के रोग-निदान और इलाज से दूसरे स्वास्थ्य-संबंधी फायदे भी हैं.

अधिक जानकारी के लिए रेफेरेंस और उपयोगी संसाधन

डिमेंशिया से सम्बंधित अन्य रोगों पर हिंदी में विस्तृत पृष्ट देखें:

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Alzheimer’s and the brain अल्ज़ाइमर रोग में मस्तिष्क के बदलाव: एक चित्रण

अल्ज़ाइमर रोग(Alzheimer’s Disease) डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का एक आम कारण है. इस रोग में मस्तिष्क में किस प्रकार हानि होती है, और समय के साथ यह कैसे बढ़ती है, उसका एक चित्रण, National Institute on Aging के सौजन्य से:

Alzheimers disease-brain shrinkage

The brain and our ability to do things मस्तिष्क और हमारी क्षमताएं

जब कहा जाता है कि डिमेंशिया में मस्तिष्क में हानि होती है तो कई लोग सोचते हैं कि इसका असर याददाश्त पर होगा, जैसे कि घटनाओं को याद रखना. मस्तिष्क में हानि के कारण शरीर के हर अंग पर असर होगा, यह नहीं सोचते. लोग यह नहीं मान पाते कि डिमेंशिया से व्यक्ति को चलने-फिरने में, बोलने में, खाना सटकने में, सभी कामों में दिक्कत होगी.

सच तो यह है कि मस्तिष्क काम न करे तो हम जीवित नहीं रहेंगे, क्योंकि हमारा मस्तिष्क ही पूरे शरीर का संचालन करता है. इसका सम्बन्ध सिर्फ बुद्धि या याददाश्त से नहीं, हर काम, हर अनुभूति, हर व्यवहार से है.

हिंदी विकिपीडिया के पृष्ठ मस्तिष्क से एक अंश:

मस्तिष्क के द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों का नियंत्रण एवं नियमन होता है। अतः मस्तिष्क को शरीर का मालिक अंग कहते हैं। इसका मुख्य कार्य ज्ञान, बुद्धि, तर्क शक्ति, स्मरण, विचार निर्णय, व्यक्तित्व आदि का नियंत्रण एवं नियमन करना है। … …

मस्तिष्क… चेतना (consciousness ) और स्मृति (memory) का स्थान है। सभी ज्ञानेंद्रियों – नेत्र, कर्ण, नासा, जिह्वा तथा त्वचा – से आवेग यहीं पर आते हैं, जिनको समझना अर्थात् ज्ञान प्राप्त करना मस्तिष्क का काम है। पेशियों के संकुचन से गति करवाने के लिये आवेगों को तंत्रिका सूत्रों द्वारा भेजने तथा उन क्रियाओं का नियमन करने के मुख्य केंद्र मस्तिष्क में हैं, यद्यपि ये क्रियाएँ मेरुरज्जु में स्थित भिन्न केन्द्रों से होती रहती हैं। अनुभव से प्राप्त हुए ज्ञान को संग्रह करने, विचारने तथा विचार करके निष्कर्ष निकालने का काम भी इसी अंग का है।

जब किसी को स्ट्रोक होता है, और उसके बाद वे चल-फिर नहीं पाते और बात ठीक से नहीं कर पाते, तो हम मान पाते हैं कि स्ट्रोक के कारण जो मस्तिष्क में हानि हुए होगी, यह उसका असर है. या जब दुर्घटना में सर पर चोट लगने के बाद कोई व्यक्ति लाचार हो जाता है, तब भी हम यह मान पाते हैं कि यह लाचारी तो मस्तिष्क में क्षति का असर है.

डिमेंशिया में भी मस्तिष्क के अंदर हानि होती है. पर यह हानि रातों-रात न होकर धीरे धीरे बढ़ती है. इसका किसी स्पष्ट घटना / हादसे से कोई सम्बन्ध नहीं नज़र आता. इसलिए इस को पहचानना मुश्किल होता है. यह स्वीकारना ज्यादा मुश्किल हो जाता है कि धीरे धीरे बढ़ती हुई यह हानि भी गंभीर लक्षण पैदा कर सकती है. हम यह नहीं सोच पाते कि यह हानि शरीर के हर अंग पर असर करेगी और हर काम में दिक्कत पैदा होगी.

पर स्वस्थ मस्तिष्क और डिमेंशिया से प्रभावित मस्तिष्क के अंतर का चित्र देखें तो समझना आसान हो जाता है कि इतनी हानि है तो असर भी गंभीर होगा. यह कोई एक-दो बात भूल जायेंगे, इस तक सीमित नहीं रहेगा.

स्वस्थ मस्तिष्क और अल्ज़ाइमर के रोगी का मस्तिष्क
Alzheimers brain

The brain and dementia: some pictures डिमेंशिया में मस्तिष्क में हानि होती है: कुछ चित्र

आइये कुछ चित्रों द्वारा समझें कि सामान्य व्यक्ति के मस्तिष्क में और डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के मस्तिष्क में किस प्रकार का फर्क होता है. नीचे दिए गए चित्रों में सामान्य व्यक्ति के मस्तिष्क का चित्रण और अल्ज़ाइमर के रोगी के मस्तिष्क का चित्रण है (अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण है) और समय के साथ हानि कैसे बढ़ती है, इसके भी चित्र हैं.

इन चित्रों से यह स्पष्ट हो जाता है कि मस्तिष्क की इतनी हानि है तो व्यक्ति पर अच्छा खासा असर तो होगा ही, और गंभीर लक्षण नज़र आना स्वाभाविक है. (अन्य डिमेंशिया के प्रकारों में भी मस्तिष्क में गंभीर हानि होती है)


स्वस्थ मस्तिष्क और अल्ज़ाइमर के रोगी का मस्तिष्क

चित्र का सौजन्य: National Institute on Aging/National Institutes of Health


समय के साथ मस्तिष्क में हानि कैसे बढ़ती है: अल्ज़ाइमर के रोगी का मस्तिष्क

चित्र का सौजन्य: National Institute on Aging/National Institutes of Health


जब कभी व्यक्ति कुछ अजीब व्यवहार दिखाएँ, या किसी ऐसी बात से कन्फ्यूज़ हो जाएँ जो आपको सरल और साधारण लगे, तो इन चित्रों को याद करें. यह स्वीकार करना आसान हो जाएगा कि मस्तिष्क में इस प्रकार की हानि है तो व्यक्ति को वास्तव में कठिनाई हो रही होगी.

Dementia is not normal ageing डिमेंशिया बुढापे का सामान्य अंग नहीं है

कई लोग डिमेंशिया को बुढ़ापे का सामान्य अंग समझते हैं, या सोचते हैं कि डिमेंशिया एक तरह का तेजी से होने वाला बुढ़ापा है. इस सोच की वजह से अगर डिमेंशिया के लक्षण चालीस-पचास या उससे भी कम उम्र में नज़र आएँ, तो लोग उन पर ध्यान नहीं देते और निदान नहीं करवाते. वे यह भी सोचते हैं कि उम्र बढ़ेगी तो डिमेंशिया तो सबको होगा ही.

डिमेंशिया की संभावना उम्र बढ़ने के साथ साथ बढ़ती है, पर उम्र बढ़ने पर डिमेंशिया होगा, यह ज़रूरी नहीं है: ऐसे कई बड़ी उम्र के लोग हैं, अस्सी नब्बे या उससे भी बड़ी उम्र के लोग, जिनके दिमाग तेज रहता हैं और वे सतर्क और चुस्त रहते हैं; डिमेंशिया के लक्षणों का उनमें नामोनिशान नहीं होता. मस्तिष्क में उम्र के साथ कुछ बदलाव तो होते हैं, पर ये डिमेंशिया नहीं पैदा करते; डिमेंशिया मस्तिष्क में किसी रोग के कारण हुई असामान्य हानि की वजह से होता है.

डिमेंशिया के लक्षण बढ़ती उम्र में होते सामान्य बदलाव से भिन्न हैं: शुरू शुरू में भले ही डिमेंशिया के बदलाव आम बुढ़ापे के बदलाव जैसे लगें, पर समय के साथ यह नज़र आने लगता है कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति कुछ अजीबोगरीब तरह से पेश आ रहे हैं. कुछ तो प्रॉब्लम है. स्वभाव/ चरित्र में फर्क दिखने लगता है. सामान्य, स्वस्थ बुज़ुर्ग छोटी मोटी बात भूल जाते हैं, पर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति तो यह भी भूल सकते हैं कि उनका घर कहाँ है, वे रिटायर्ड हैं या नहीं, वे अधेड़ उम्र के हैं या जवान, उनकी शादी हुई है या नहीं. वे घर वालों को भी ठीक से नहीं पहचान पाते. सब्जी के लिए दस रुपए की जगह वे हज़ार रुपए पकड़ा देते हैं. और भी कई लक्षण हैं जिनसे स्पष्ट हो जाता है कि व्यक्ति का व्यवहार सामान्य से बहुत भिन्न है.

कुछ प्रकार के डिमेंशिया कम उम्र में भी हो सकते हैं: डिमेंशिया चालीस-पचास या उससे भी कम उम्र में हो सकता है.

और लीजिए, एक वीडियो, यह दिखाने के लिए कि निन्यानवे की उम्र में भी कुछ लोग कितने चुस्त और सक्रिय रहते हैं: जोहरा सहगल से सुनें फैज़ अहमद फैज़ की “मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरे महबूब न मांग”