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डिमेंशिया के मुख्य प्रकार (भाग 1): संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया)

संवहनी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है जो डिमेंशिया के 20-30% केस के लिए जिम्मेदार है। यह अकेले भी पाया जाता है, और अन्य डिमेंशिया के साथ भी मौजूद हो सकता है (जैसे कि अल्ज़ाइमर और लुई बॉडी डिमेंशिया के साथ)।

(यह पोस्ट संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia): एक परिचय पृष्ठ का एक संक्षिप्त संस्करण है।)

brain vascular system

हमारे मस्तिष्क के ठीक काम करने के लिए मस्तिष्क में खून ठीक से पहुंचना चाहिए। इस के लिए हमारे मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं का एक नेटवर्क होता है (वैस्क्युलर सिस्टम)। संवहनी डिमेंशिया में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है, और मस्तिष्क के कुछ भागों में खून की सप्लाई ठीक नहीं रहती। इस तरह की हानि के कारण संवहनी डिमेंशिया के लक्षण नजर आते हैं।

रक्त के प्रवाह में हानि स्ट्रोक सम्बंधित हो सकती है, जब व्यक्ति को स्ट्रोक मिनी-स्ट्रोक हो। अन्य प्रकार की रक्त-वाहिका संबंधी हानि भी हो सकती है: मस्तिष्क में कई छोटी वाहिकाएं हैं जो गहरे भागों (श्वेत पदार्थ) में खून पहुंचाती हैं। इन में कुछ रोगों के कारण हानि हो सकती है, जैसे कि इनका सिकुड़ जाना, अकड़ जाना, इत्यादि (सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया)।

संवहनी डिमेंशिया में लक्षण इस पर निर्भर हैं कि हानि कहाँ और कितनी हुई है।

संवहनी डिमेंशिया की एक ख़ास बात यह है कि यदि हम मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में अधिक हानि न होने दें, तो लक्षण भी नहीं बढ़ेंगे। पर यदि व्यक्ति को एक और स्ट्रोक हो जाए, तो रातों-रात लक्षण काफी बिगड़ सकते हैं।

संवहनी डिमेंशिया की संभावना कम करने के लिए, और इस को बढ़ने से रोकने के लिए कारगर उपाय मौजूद हैं। स्वास्थ्य और जीवन शैली पर ध्यान देने से हमारी रक्त वाहिकाएं ठीक रहेंगी। उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, और इस तरह की जीवन-शैली सम्बंधित बीमारियों से बचें, या इन्हें नियंत्रण में रखें। इस से संवहनी डिमेंशिया की संभावना कम होगी, और यदि यह हो भी तो हम इसकी प्रगति धीमी कर सकते हैं। हृदय स्वास्थ्य के लिए जो कदम उपयोगी है, वे रक्त वाहिका समस्याओं से बचने के लिए भी उपयोगी हैं।

यह पोस्ट संवहनी डिमेंशिया (वैस्कुलर डिमेंशिया, Vascular dementia): एक परिचय पृष्ठ का एक संक्षिप्त संस्करण है। संवहनी डिमेंशिया पर अधिक जानकारी के लिए और अन्य संसाधन के लिए क्लिक करें: इस पृष्ठ पर चर्चा के विषय हैं — संवहनी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) क्या है, संवहनी डिमेंशिया के प्रकार (स्ट्रोक से संबंधित डिमेंशिया, सबकोर्टिकल संवहनी डिमेंशिया), इस के लक्षण और ये कैसे बढ़ते हैं, इस के उपचार, और इस पर अधिक जानकारी के लिए संसाधन।

अन्य प्रमुख प्रकार के डिमेंशिया पर भी हिंदी पृष्ठ देखें:

मस्तिष्क के वैस्क्यूलर सिस्टम के चित्र का श्रेय: National Institute of Aging

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Different dementia diseases and symptoms अलग अलग रोग और डिमेंशिया लक्षण

डिमेंशिया के लक्षणों का मूल कारण है मस्तिष्क में हुई हानि, जिसके कारण व्यक्ति के सोचने-समझने और काम करने में समस्याएँ होने लगती हैं. मोटे तौर पर सब लक्षण संज्ञान से संबंधित हैं, पर फिर भी, किसी विशिष्ट व्यक्ति में कौनसे लक्षण पेश होंगे, वे कितने गंभीर होंगे, और समय के साथ कैसे बढ़ेंगे, यह फर्क रहता है.

मस्तिष्क के कई भाग हैं और वे अलग अलग कार्यों का नियंत्रण करते हैं. डिमेंशिया के लक्षण अनेक रोगों के कारण हो सकते हैं. यह सब रोग मस्तिष्क में हानि से संबंधित हैं, पर हर रोग में मस्तिष्क के किस भाग में कितनी हानि होती है, और समय के साथ यह कैसे बढ़ती है, यह अलग अलग है. मस्तिष्क के किस भाग में कितनी क्षति हुई है, लक्षण उसके अनुसार ही होंगे.

उदाहरणतः, अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer’s Disease) में शुरू में हिप्पोकैम्पस (hippocampus) में असामान्य प्रोटीन खंड जमा होने लगते हैं. हिप्पोकाम्पस हमारे मस्तिष्क का वह भाग है जिसका सम्बन्ध हाल में हुई घटनाओं को याद रखने से है. इसलिए अल्ज़ाइमर रोग का एक शुरूआती लक्षण यह है कि व्यक्ति को कुछ ही देर पहले हुई बातों को याद रखने में दिक्कत होने लगती है (short term memory loss). जैसे जैसे रोग के कारण मस्तिष्क में हानि अन्य भागों में फैलती है, उन प्रभावित भागों से संबंधित कार्यों में भी व्यक्ति को दिक्कत होने लगती है.

Gray739-emphasizing-hippocampusअल्ज़ाइमर में सबसे पहले प्रभावित भाग है हिप्पोकैम्पस

पर एक अन्य डिमेंशिया रोग है फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (Fronto-temporal dementia). वास्तव में यह एक रोग नहीं, बल्कि एक ऐसे रोगों का समूह है जिन सब में हानि मस्तिष्क के फ्रंटल लोब और टेम्पोरल लोब में होती है.

फ्रंटल लोब (frontal lobe, ललाटखंड, मस्तिष्क का सामने वाला भाग) का सम्बन्ध हमारे निर्णय लेने की क्षमता से है. क्या महत्त्वपूर्ण है और क्या नहीं, किस कार्य करने का क्या अंजाम होगा, हम चुनाव कैसे करें, कौन सा व्यवहार समाज में अनुचित है, यह सब हम अपने फ्रंटल लोब के कारण जाना पाते हैं और कर पाते पाते हैं. ध्यान देना और योजना बनाना, भावनाओं के नियंत्रण रखना, इन सब में फ्रंटल लोब की जरूरत है. टेम्पोरल लोब (temporal lobe, शंख खंड) का भाषा समझने और इस्तेमाल करने से, और इन्द्रिओं से आये संकेत समझने और याद रखने से है.

Cerebrum lobesफ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में फ्रंटल लोब और टेम्पोरल लोब के कुछ अंशों में हानि होती है

जब किसी व्यक्ति को फ्रंटोटेम्पोरल किस्म का डिमेंशिया होता है, तो शुरूआती लक्षण अधिकतर भाषा-संबंधी या व्यवहार संबंधी होते हैं, याददाश्त संबंधी नहीं. यह इसलिए क्योंकि हानि मस्तिष्क के फ्रंटल लोब और टेम्पोरल लोब में हुई है, हिप्पोकैम्पस में नहीं. पर फ्रंटोटेम्पोरल किस्म का डिमेंशिया में भी, कौनसे लक्षण पेश आयेंगे यह इस बात पर निर्भर है कि फ्रंटल और टेम्पोरल लोब के किस अंश में कितनी हानि हुई है. हो सकता है एक व्यक्ति का व्यवहार अशिष्ट या अश्लील हो, पर दूसरे व्यक्ति में पहले दिखना वाला प्रमुख लक्षण हो भाषा की समस्या.

एक और उदाहरण है संवहनी मनोभ्रंश (नाड़ी-संबंधी डिमेंशिया, Vascular dementia). यह नाड़ी-संबंधी समस्याओं के कारण होने वाले डिमेंशिया के लिए एक व्यापक शब्द है. मोटे तौर पर कहें तो रक्त वाहिकाओं में समस्याओं के कारण मस्तिष्क के कुछ भागों में खून कम पहुँचता है, या बिलकुल ही नहीं पहुँचता, और नतीजन मस्तिष्क का कुछ भाग नष्ट हो जाता है. कौनसे लक्षण नज़र आयेंगे यह इसपर निर्भर है कि मस्तिष्क के किस भाग में क्षति हुई है, और क्षति कितनी गंभीर है.

डिमेंशिया और एल्ज़ाइमर्ज़

हालाँकि सुरेश कलमाड़ी की वजह से डिमेंशिया शब्द कुछ दिन सुर्खियों में रहा, परन्तु डिमेंशिया क्या है, इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है. कुछ दिन पहले मनाए गए विश्व एल्ज़ाइमर्ज़ दिवस के दौरान भी कुछ जानकारी अखबारों में छपी, पर डिमेंशिया और एल्ज़ाइमर्ज़ किस तरह से जुड़े है, क्या ये एक ही रोग के दो नाम हैं, या क्या ये अलग हैं, इस को लेकर कई लोगों के मन में तरह तरह के प्रश्न आते हैं.

तो लीजिए, एक संक्षिप्त सा स्पष्टीकरण:

वास्तव में, डिमेंशिया एक बीमारी का नाम नहीं है; यह एक लक्षणों के समूह का नाम है. यह सब लक्षण दिमाग की ताकत कम होने  की वजह से दिखाई देते हैं, और डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को अनेक जरूरी कार्यों में कठिनाई महसूस होने लगती है.

डिमेंशिया के लक्षणों में से एक प्रमुख लक्षण भूलना हैं, और अक्सर डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों में यह लक्षण ज्यादा आसानी से नज़र आता है. इसी वजह से कई लोग डिमेंशिया को “भूलने कि बीमारी” कहते हैं, पर डिमेंशिया के कई अन्य लक्षण भी हैं, जैसे कि रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत होना, हिसाब न कर पाना, बोलते वक्त सही शब्द न सूझना, निर्णय लेने में दिक्कत, इत्यादि.

डिमेंशिया अनेक कारणों से हो सकता है. एल्ज़ाइमर्ज़ रोग डिमेंशिया का एक आम कारण है, और अनुमान लगाया जाता है कि ५० से ७० प्रतिशत डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों को एल्ज़ाइमर्ज़ होता है. परन्तु डिमेंशिया के अन्य भी कई प्रकार हैं. उदाहरणतः, कुछ लोगों में स्ट्रोक के बाद डिमेंशिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. और पार्किंसन्स रोग से ग्रस्त व्यक्तियों में से तकरीबन एक-तिहाई लोग कुछ वर्षों बाद डिमेंशिया से भी ग्रस्त हो जाते हैं.

तो, डिमेंशिया एक लक्षणों के समूह का नाम है, और यह लक्षण अनेक कारणों से उत्पन्न हो सकते हैं. एल्ज़ाइमर्ज़ रोग एक ऐसा रोग है जिससे डिमेंशिया के लक्षण पैदा होते हैं. हम कह सकते हैं कि एल्ज़ाइमर्ज़ रोग से ग्रस्त व्यक्ति को डिमेंशिया है, परन्तु हर एक डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति को एल्ज़ाइमर्ज़ हो, ऐसा नहीं है. डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों में से ५० से ७० % एल्ज़ाइमर्ज़ के रोगी हैं, और बाकी लोगों को अन्य बीमारियाँ हैं जिनकी वजह से वे ये लक्षण दर्शा रहे हैं.