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पार्किंसन रोग और डिमेंशिया (Parkinson’s Disease and Dementia)

हम में से कई लोगों ने पार्किंसन रोग (Parkinson’s Disease) से ग्रस्त लोगों को देखा है, और हम जानते हैं कि पार्किंसन एक गंभीर समस्या है. दवा से इस में पूरा आराम नहीं मिल पाता, और व्यक्ति की स्थिति समय के साथ खराब होती जाती है. पर आम तौर पर हम पार्किंसन रोग के सिर्फ कुछ मुख्य शारीरिक लक्षण जानते हैं —  हम यह नहीं जानते हैं कि इस में अनेक दूसरे प्रकार के लक्षण भी होते हैं. ये भी समय के साथ साथ बिगड़ते जाते हैं, और अनेक तरह से व्यक्ति के जीवन में बाधा डालते हैं. व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं बिता पाते. एक चिंताजनक पहलू है पार्किंसन और डिमेंशिया (मनोभ्रंश, dementia) के बीच का सम्बन्ध: पार्किंसन वाले व्यक्तियों में से कई व्यक्तियों को डिमेंशिया भी हो जाता है.

parkinson man

पार्किंसन रोग मस्तिष्क के कुछ भागों में विकार के कारण होता है. इसकी खास पहचान वाले लक्षण हैं: कंपन (ट्रेमर), जकड़न, काम करने में धीमापन, गति में बदलाव, शारीरिक संतुलन (बैलैंस) में दिक्कत. इस रोग को अकसर मोटर डिसॉर्डर या मूवमेंट डिसॉर्डर भी कहा जाता है (हरकत में विकार).

पार्किंसन के ऐसे भी कई लक्षण हैं जिन का चलने फिरने या हरकत से सम्बन्ध नहीं है. उदाहरण- मूड के विकार, ध्यान लगाने में समस्या, योजना न बना पाना, याददाश्त की समस्या, दृष्टि भ्रम, पेशाब करने में दिक्कत, सूंघने की काबिलियत खो देना, नींद में समस्या, वगैरह.

पार्किंसन रोग एक प्रगतिशील विकार हैं. इस के अधिकाँश केस बड़ी उम्र के लोगों में होते हैं, पर यह कम उम्र में भी हो सकता है. इसके लक्षण समय के साथ बिगड़ते जाते हैं. चलने फिरने और शरीर पर नियंत्रण रख पाने की समस्याएँ बहुत गंभीर हो जाती हैं. इस के अलावा अन्य लक्षण भी ज्यादा बढ़ जाते हैं जैसे कि शरीर में दर्द, थकान, और रक्तचाप कम होना. निगलने में दिक्कत होने लगती है, और सही मात्रा में जल और पौष्टिक खाना देना मुश्किल हो जाता है. अग्रिम अवस्था में पार्किंसन से ग्रस्त व्यक्ति डिमेंशिया और डिप्रेशन के शिकार भी हो सकते हैं.

पार्किंसन और डिमेंशिया के बीच का सम्बन्ध चिंताजनक है, क्योंकि दोनों ही बहुत गंभीर रोग हैं. कुछ अनुमान के अनुसार करीब एक-तिहाई पार्किंसन रोगियों को डिमेंशिया होगा. इसे पार्किन्संस रोग डिमेंशिया (Parkinson’s Disease Dementia) कहते हैं.

पार्किंसन रोग और डिमेंशिया के बीच एक दूसरा सम्बन्ध भी है. कुछ प्रकार के डिमेंशिया में व्यक्ति में पर्किन्सोनिस्म (पार्किन्सन किस्म के लक्षण) भी हो सकता है. “डिमेंशिया विथ लुइ बॉडीज” (Dementia with Lewy Bodies) नामक डिमेंशिया में यह लक्षण आम हैं: अनुमान है की इस प्रकार के डिमेंशिया में करीब दो-तिहाई लोगों में हरकत की समस्याएँ होंगी.

lewy body in neuron

अब तक के शोध से यह पता चला है कि पार्किंसन रोग में और लुइ बॉडी डिमेंशिया में मस्तिष्क में हुए बदलाव में समानता है—दोनों में मस्तिष्क की कोशिकाओं (मस्तिष्क के सेल) में एक असामान्य संरचना, “लुइ बॉडी”, पायी जाती है. “लुइ बॉडी” की उपस्थिति के महत्त्व को समझने की कोशिश जारी है. कुछ विशेषज्ञों का विचार है कि “पार्किन्संस रोग डिमेंशिया” और  “डिमेंशिया विथ लुइ बॉडीज” मस्तिष्क में एक खास प्रोटीन से संबंधित एक विकार के दो अलग रूप हैं. इन दोनों में अग्रिम अवस्था में लक्षण और भी सामान होते जाते हैं.

वर्तमान रोग-निदान प्रणाली के हिसाब से “पार्किन्संस रोग डिमेंशिया” और  “डिमेंशिया विथ लुइ बॉडीज”, दोनों एक श्रेणी (“लुइ बॉडी डिमेंशिया”, Lewy Body Dementia) के अंतर्गत दो अलग रोग-निदान हैं. कौन से लक्षण किस क्रम में होते हैं, रोग-निदान में इस्तेमाल नाम उस पर निर्भर है. यह नाम मिलते जुलते हैं, और कुछ डॉक्टर कभी किसी नाम का इस्तेमाल करते हैं, कभी किसी दूसरे नाम का. परिवारों के लिए यह काफी कन्फ्यूजन पैदा करता है.

परिवार वालों को इस बात से कोई खास वास्ता नहीं है कि मस्तिष्क के सेल में क्या नुकसान हो रहा है, या  विशेषज्ञ किस नाम पर सहमत होंगे. वे यह जानना चाहते हैं कि व्यक्ति को किस किस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं, किस तरह के उपचार संभव हैं, और देखभाल कैसे करनी होगी. इस के लिए पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया के बीच के सम्बन्ध पर कुछ मुख्य तथ्य :

  • पार्किंसन रोगी के केस में: यदि किसी को पार्किंसन रोग है, तो आम-तौर से पहचाने जाने वाले शारीरिक पार्किंसन किस्म के लक्षणों के अलावा व्यक्ति में दूसरे लक्षण भी होते हैं. व्यक्ति में डिमेंशिया पैदा होने की  ऊंची संभावना है.
  • डिमेंशिया के लक्षण होने पर: डिमेंशिया वाले व्यक्तियों में पार्किंसन के लक्षण भी हो सकते हैं. पार्किंसन किस्म के लक्षण की समस्या “डिमेंशिया विथ लुइ बॉडीज” वाले लोगों में आम है, और कुछ अन्य प्रकार के डिमेंशिया में भी हो सकती है
  • डॉक्टर से जानकारी और सलाह: डॉक्टर स्थिति के अनुसार तय करेंगे कि व्यक्ति को किन लक्षणों में कैसे राहत देने की कोशिश करें. वे देखेंगे कि लक्षण कितने गंभीर हैं और किस क्रम में पेश हुए हैं. रोग-निदान भी डॉक्टर उसी अनुसार देंगे. परिवार वालों को डॉक्टर से खुल कर बात कर लेनी चाहिए ताकि वे देखभाल के लिए तैयार हो पायें.

अधिक जानकारी के लिए रेफरेंस: हिंदी में जानकारी:

अधिक जानकारी के लिए रेफरेंस: कुछ उपयोगी, विश्वसनीय अंग्रेजी वेब साईट और पृष्ठ:

डिमेंशिया से सम्बंधित अन्य रोगों पर हिंदी में विस्तृत पृष्ट देखें:

चित्रों का श्रेय: कोशिका में लुई बॉडी का चित्र: Marvin 101 (Own work) [CC BY-SA 3.0] (Wikimedia Commons) पार्किंसन के व्यक्ति का चित्र: By Sir_William_Richard_Gowers_Parkinson_Disease_sketch_1886.jpg: derivative work: Malyszkz [Public domain], via Wikimedia Commons

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डिमेंशिया के मुख्य प्रकार (भाग 2): लुई बॉडी डिमेंशिया

लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) चार प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया में से एक है। परन्तु इस के बारे में जानकारी बहुत कम है और इस का अकसर सही रोग निदान नहीं हो पाता। रोग-निदान समय से न मिल पाने के कारण व्यक्ति को अधिक दिक्कत होती है, और देखभाल भी ठीक से करना ज्यादा मुश्किल होता है।

[यह पोस्ट लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia): एक परिचय पृष्ठ का एक संक्षिप्त संस्करण है।]

lewy body in neuron

लुई बॉडी डिमेंशिया की खास पहचान है मस्तिष्क की कोशिकाओं में “लुई बॉडी” नामक असामान्य संरचना की उपस्थिति, जो पार्किन्सन रोग में भी पायी जाती है। इस के विशिष्ट लक्षण में प्रमुख हैं — दृष्टि विभ्रम, सोचने-समझने की क्षमता कम होना, और इन का रोज-रोज बहुत भिन्न होना, नींद में व्यवहार विकार, और पार्किंसन किस्म के लक्षण (जैसे कि कम्पन, अकदन, चलने में दिक्कत, वगैरह)।

लुई बॉडी डिमेंशिया प्रगतिशील है और समय के साथ व्यक्ति की हालत खराब होती जाती है। कई तरह के लक्षण होने लगते हैं. हर काम में दिक्कत होने लगती है। अंतिम कारण में व्यक्ति पूरी तरह निर्भर हो जाते है।

लुई बॉडी डिमेंशिया लाइलाज है—दवा से न तो हम इसे रोक सकते हैं, न ही इस के बढ़ने की गति को धीमा कर सकते हैं। हाँ, दवा से लक्षणों से कुछ राहत देने की कोशिश हो सकती है। इस से कैसे बचें, इस के लिए भी कोई उपाय मालूम नहीं है।

लुई बॉडी डिमेंशिया वाले लोगों को कई बार अल्ज का गलत रोग निदान मिल जाता है। इस गलत रोग-निदान से समस्या हो सकती है क्योंकि कुछ दवा जो अल्ज में उपयोगी हो सकती हैं, उन से लुई बॉडी डिमेंशिया वाले लोगों को नुकसान हो सकता है।
इस पर अधिक जानकारी के लिए हमारे इस पृष्ठ को देखें: लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia): एक परिचय पृष्ठ पर चर्चा के विषय हैं: लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) क्या है, इस पर जानकारी की कमी के कारण दिक्कतें, इस के लक्षण, रोग-निदान कैसे होता है, कुछ अन्य तथ्य, उपचार, और अधिक जानकारी और सपोर्ट के लिए उपयोगी संसाधन

अन्य प्रमुख प्रकार के डिमेंशिया पर भी हिंदी पृष्ठ देखें:

कोशिका में लुई बॉडी के चित्र का श्रेय: Marvin 101 (Own work) [CC BY-SA 3.0] (Wikimedia Commons)

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Dementia memory loss examples डिमेंशिया में भूलने के कुछ उदाहरण

उम्र के साथ याददाश्त में और काम करने की क्षमता में कुछ कमी होना स्वाभाविक है, पर डिमेंशिया के लक्षण इन सामान्य प्रॉब्लम से अलग हैं. याददाश्त की समस्याओं को ही लीजिए. कुछ उदाहरण देखें.

मान लीजिए कि आप पापा और पूरे परिवार के साथ कुछ साल पहले एक शादी पर मुम्बई गए थे, और आपने वहाँ एक पूरा महीना बिताया था. सामान्य बुज़ुर्ग शायद यह भूल जाएँ कि कितने साल पहले गए थे या किस महीने में गए थे, और कोलाबा की सैर उस ट्रिप में करी थी या उससे पहले वाले मुम्बई के ट्रिप में. पर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति यह भी भूल सकते हैं कि वे किसी शादी में मुम्बई गए थे, या उन्होंने मुम्बई शहर देखा हुआ है या नहीं. यानि कि, किसी बड़ी घटना का एक हिस्सा भूल जाना सामान्य है, पर उसे पूरी तरह भूल जाना किसी समस्या का परिचायक है.

आम-तौर पर यदि हम कुछ भूल भी रहे हों तो याद दिलाने पर, या समझाने पर, हमें बात याद आ जाती है, पर डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को याद दिलाने पर भी अक्सर बात नहीं याद आती.

या वस्तुओं के उपयोग करने को लीजिए. वस्तु किस काम के लिए है, और उसका उपयोग कैसे करें, यह भी याददाश्त पर निर्भर है. रोज काम आने वाली वस्तु के इस्तेमाल में पहले के मुकाबले कुछ धीरे पड़ जाना तो उम्र के साथ हो सकता है. पर ऐसा सामान्य नहीं है कि व्यक्ति यही भूल जाएँ कि वो वस्तु किस काम के लिए है.

अगर व्यक्ति चाबी देखकर कुछ चकराए हुए लगें, चाबी को ऐसे टटोलें जैसे कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि इस वस्तु को कैसे पकड़ते हैं और किस काम के लिए इस्तेमाल करें, तो यह व्यवहार सामान्य बुढ़ापे का अंग नहीं है. शुरूआती अवस्था में ऐसा कन्फ्यूज़न कुछ पल होता है, फिर चला जाता है, या व्यक्ति उसे छुपा पाते हैं. रोग के बढ़ने पर यह कन्फ्यूज़न बढ़ता है और पास वालों को स्पष्ट नज़र आने लगता है

डिमेंशिया / मनोभ्रंश का भूलना सामान्य भूलने से फ़र्क है

सामान्य भूलने में और डिमेंशिया के भूलने में फर्क पर कुछ अन्य उदाहरण:

यह भूल जाना सामान्य है कि आज कौन सा वार है. परन्तु यह भूल जाना कि दस मिनट पहले नाश्ता करा था और फिर दुबारा नाश्ता माँगना, इस तरह का भूलना समस्या का बोधक है. अनजान शहर में रास्ता खोना साधारण बात है. पर परिचित जगह में कन्फ्यूज़ होना सामान्य नहीं है, जैसे कि अपने ही घर में यह भूल जाना कि गुसलखाना किधर है. दूर की जान-पहचान वाले को न पहचान पाना एक बात है, पर डिमेंशिया में तो व्यक्ति अपने ही बीवी-बच्चों के नाम भूल जाते हैं या उन्हें पहचान नहीं पाते. वे यही भूल सकते हैं कि वे रिटायर हो चुके हैं, या उनकी कभी शादी हुई थी. इस तरह के महत्त्व-पूर्ण बातों को भूलना सामान्य बुढ़ापे का अंग नहीं है.

डिमेंशिया की अग्रिम अवस्था में तो व्यक्ति अपना नाम और पहचान भी भूल जाते हैं. इस स्थिति तक पहुंचने पर तो यह सभी को स्पष्ट नज़र आने लगता है कि व्यक्ति सामान्य बुजुर्गों जैसे नहीं है. हम कितने भी बूढ़े क्यों न हों, यह कल्पना करना मुश्किल है कि हम अपना ही नाम भूल जायेंगे!

यह गौर करें कि डिमेंशिया की समस्याएं अचानक, रातों-रात नहीं होतीं. ये धीरे धीरे बढ़ती हैं. शुरू में ये छोटी, मामूली बातों में दिखाई देती हैं और तुच्छ लगती हैं, और परिवार वाले इनको नजरअंदाज कर देते हैं. शुरू में व्यक्ति भी अपनी समस्याओं को छुपा लेते हैं. शायद उन्हें डर लगता हो कि लोग उन पर हसेंगे या उन्हें पागल कहेंगे. जैसे जैसे स्थिति बदतर होती है, यह छुपाना मुश्किल होने लगता है. बाहर वालों के सामने तो वे सामान्य व्यवहार कर पाते हैं, पर घर पर, चौबीसों घंटे साथ रहने वालों को लगने लगता है कि कुछ ग्रिड है. यदि परिवार वाले सतर्क रहें तो पहचान पायेंगे कि क्या भूलना सामान्य किस्म का है या गंभीर समस्या का सूचक हो सकता है. वे फिर डॉक्टर से सलाह करके उचित निदान पा सकते हैं. (वैसे भी, अगर शक हो कि शायद समस्या डिमेंशिया जैसे है, तो सलाह लेना अच्छा होगा)

इस पर और कुछ जुड़े हुए उपयोगी विषयों पर आप चर्चा और लिंक इस पृष्ठ पर देख सकते हैं: डिमेंशिया क्या है.

Dementia and memory loss डिमेंशिया और “भूलने की बीमारी”

डिमेंशिया को कभी कभी “भूलने की बीमारी” का लेबल दिया जाता है. इस लेबल से सुनने वाले यह समझ बैठते हैं कि डिमेंशिया का एक-मात्र लक्षण है स्मृति लोप. वे सोचते हैं कि व्यक्ति की याददाश्त बिलकुल ही खराब हो जायेगी या शायद पुरानी यादें पूरी तरह गायब हो जायेंगे. या लोग यह सोचते हैं कि भूलने की प्रॉब्लम तो बढ़ती उम्र में सबको होती है, डिमेंशिया में शायद कुछ ज्यादा होती होगी–दिन में एक बार चाबी खोने की बजाय व्यक्ति दो-तीन बार खो देते होंगे. या शायद कुछ लोगों को यह डर होने लगता है कि अगर वे कुछ भी भूलें तो उन्हें डिमेंशिया हो गया है.

इस पोस्ट में देखें कि डिमेंशिया को “भूलने की बीमारी कहना कितना सही है, और इससे किस तरह की गलत धारणाएं पैदा हो सकती हैं.

अल्ज़ाइमर प्रकार के डिमेंशिया में याददाश्त की समस्या शुरू की अवस्था का एक महत्वपूर्ण लक्षण है: (Memory problems are an initial, characteristic symptom of Alzheimer’s Disease) डिमेंशिया के लक्षण अनेक रोगों के कारण हो सकते हैं, जैसे कि अल्जाइमर रोग (एल्ज़ाइमर्ज़, Alzheimer’s Disease), फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD, fronto-temporal dementia), लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia), संवहनी मनोभ्रंश (नाड़ी-सम्बंधी डिमेंशिया, वास्कुलर डिमेंशिया Vascular dementia), इत्यादि. डिमेंशिया पैदा करने वाले रोगों में शुरू में दिखाई देने वाले लक्षण भिन्न भिन्न हैं. डिमेंशिया का सबसे आम कारण है अल्जाइमर रोग, और इसमें भूलने की प्रॉब्लम एक प्रारंभिक और प्रमुख लक्षण होता है. इसे कई लोग अल्ज़ाइमर का एक प्रतिनिधिक लक्षण समझते हैं.

ऐसे कई प्रकार के डिमेंशिया हैं जिनमें शुरू में भूलने का लक्षण प्रमुख नहीं होता: (Memory problems are not necessarily an initial symptom in some forms of dementia) कुछ किस्म के डिमेंशिया में भूलने की समस्या प्रारंभिक अवस्था में प्रमुख न हो या शायद नज़र ही न आये. उदाहरण के तौर पर, संवहनी डिमेंशिया में शुरूआती लक्षणों में अक्सर भूलने की समस्या इतनी ज्यादा नहीं होती जितनी की शारीरिक कमजोरी और मनोदशा (मूड) में अस्थिरता/ उतार-चढ़ाव(mood fluctuations). एक अन्य डिमेंशिया, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में शुरू में याददाश्त पर असर नहीं होता–इसमें शुरू के आम लक्षण हैं व्यक्तित्व का बदलना, मूड अस्थिरता, भाषा-संबंधी दिक्कतें, अशिष्ट व्यवहार, अंतर्बाधा खो देना (disinhibition).

डिमेंशिया में भूलने के अलावा भी अनेक लक्षण हैं जो गंभीर हैं और जिनसे व्यक्ति को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है: (Apart from memory problems, there are many other, very serious symptoms of dementia that cause great difficulties to persons with dementia) डिमेंशिया को भूलने की बीमारी कहने से लगता है कि डिमेंशिया में सिर्फ पुरानी बातें भूलने की समस्या हैं, बाकी सब ठीक-ठाक है. यह धारणा गलत है. डिमेंशिया के कई गंभीर लक्षण हैं–भूलना उनमें से सिर्फ एक है. हो सकता है कि व्यक्ति को समय और स्थान का बोध नहीं रहे, हिसाब करने में दिक्कत होने लगे, कुछ भी प्लॉन करने में दिक्कत होने लगे, सामान्य दैनिक कार्य मुश्किल हो जाएँ, चीज़ों को पहचानने और इस्तेमाल करने में कठिनाई होने लगे, बात करते हुए सही शब्द नहीं सूझें, दूसरों की बात समझने और याद रखने में दिक्कत हो. चरित्र और व्यवहार भी काफी बदल सकता है. व्यक्ति को अवसाद हो सकता है, ये वे बिना किसी स्पष्ट कारण के उत्तेजित हो सकते हैं, वगैरह. डिमेंशिया की अंतिम अवस्था में व्यक्ति औरों पर पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं, और शय्याग्रस्त (bedridden) हो जाते हैं. “भूलने की बीमारी” के लेबल के इस्तेमाल से इन अन्य गंभीर समस्याओं का अंदाज़ा नहीं हो पाता.

भूलने के कई कारण हो सकते हैं–सब भूलने की जड़ डिमेंशिया नहीं है: (Not all memory loss is dementia) यह तो जांच से ही पता चलेगा कि भूलना किस वजह से हो रहा है, पर भूलने के कई संभव कारण हैं. जैसे कि, अवसाद या अन्य वजह से बातों पर पूरी तरह ध्यान न दे पाना भूलने का एक आम कारण है.

डिमेंशिया का “भूलना” सदमे से हुए अम्नीसिया (स्मृतिलोप/ शब्दस्मृतिभ्रंश) जैसा नहीं है: Dementia should not be confused with films centering around accidents and amnesia) याददाश्त की समस्या डिमेंशिया का एक लक्षण जरूर है, पर इसको ऐसी स्थिति से नहीं कन्फ्यूज़ करें जैसे कि जब किसी एक्सीडेंट या किसी अन्य सदमे की वजह से कोई व्यक्ति पुरानी बातें भूल जाते हैं. कुछ फिल्मों में हमने ऐसे स्मृति-लोप का चित्रण देखा हो, जैसे कि श्रीदेवी की पुरानी फिल्म सदमा और आमिर खान की फिल्म गजनी–ये फिल्में डिमेंशिया के चित्रण नहीं हैं. पर अगर लोग सोचें कि डिमेंशिया एक “भूलने की बीमारी” है, तो कन्फ्यूज़ होना स्वाभाविक है.

डिमेंशिया का “भूलना” उम्र के साथ होने वाले सामान्य भूलने के किस्सों जैसा नहीं है: (Dementia memory problems are not the same as memory decline seen in healthy seniors) कुछ भूलना तो सबके साथ लगा रहता है, और यह उम्र के साथ बढ़ता भी है. पर हरेक भूलने की घटना को डिमेंशिया का भूलना समझना गलत है. डिमेंशिया में भूलना कुछ अलग प्रकार का होता है.

तो हाँ, यह सच है कि भूलना डिमेंशिया के लक्षणों में से एक अहम लक्षण है, पर कोई व्यक्ति कुछ भूले, इसका यह मतलब नहीं कि उन्हें डिमेंशिया ही है. और न ही हम कह सकते हैं कि अगर व्यक्ति की याददाश्त सही सलामत है, तो उन्हें डिमेंशिया नहीं है. “भूलने की बीमारी” का लेबल हमें भ्रमित कर सकता है, और हम सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेने में झिझक सकते हैं. अच्छा यह होगा कि हम “भूलने” पर फोकस करने की बजाय ये देखें कि क्या व्यक्ति के सोचने-समझने में और काम करने में कुछ प्रॉब्लम हो रही है–हमें समस्त लक्षणों के प्रति सतर्क रहना होगा, सिर्फ याददाश्त पर नहीं.

लक्षणों पर चर्चा आप मेरे वेबसाइट के इस पृष्ठ पर देख सकते हैं: डिमेंशिया क्या है.