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डिमेंशिया के मुख्य प्रकार (भाग 2): लुई बॉडी डिमेंशिया

लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) चार प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया में से एक है। परन्तु इस के बारे में जानकारी बहुत कम है और इस का अकसर सही रोग निदान नहीं हो पाता। रोग-निदान समय से न मिल पाने के कारण व्यक्ति को अधिक दिक्कत होती है, और देखभाल भी ठीक से करना ज्यादा मुश्किल होता है।

[यह पोस्ट लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia): एक परिचय पृष्ठ का एक संक्षिप्त संस्करण है।]

lewy body in neuron

लुई बॉडी डिमेंशिया की खास पहचान है मस्तिष्क की कोशिकाओं में “लुई बॉडी” नामक असामान्य संरचना की उपस्थिति, जो पार्किन्सन रोग में भी पायी जाती है। इस के विशिष्ट लक्षण में प्रमुख हैं — दृष्टि विभ्रम, सोचने-समझने की क्षमता कम होना, और इन का रोज-रोज बहुत भिन्न होना, नींद में व्यवहार विकार, और पार्किंसन किस्म के लक्षण (जैसे कि कम्पन, अकदन, चलने में दिक्कत, वगैरह)।

लुई बॉडी डिमेंशिया प्रगतिशील है और समय के साथ व्यक्ति की हालत खराब होती जाती है। कई तरह के लक्षण होने लगते हैं. हर काम में दिक्कत होने लगती है। अंतिम कारण में व्यक्ति पूरी तरह निर्भर हो जाते है।

लुई बॉडी डिमेंशिया लाइलाज है—दवा से न तो हम इसे रोक सकते हैं, न ही इस के बढ़ने की गति को धीमा कर सकते हैं। हाँ, दवा से लक्षणों से कुछ राहत देने की कोशिश हो सकती है। इस से कैसे बचें, इस के लिए भी कोई उपाय मालूम नहीं है।

लुई बॉडी डिमेंशिया वाले लोगों को कई बार अल्ज का गलत रोग निदान मिल जाता है। इस गलत रोग-निदान से समस्या हो सकती है क्योंकि कुछ दवा जो अल्ज में उपयोगी हो सकती हैं, उन से लुई बॉडी डिमेंशिया वाले लोगों को नुकसान हो सकता है।
इस पर अधिक जानकारी के लिए हमारे इस पृष्ठ को देखें: लुई बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia): एक परिचय पृष्ठ पर चर्चा के विषय हैं: लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) क्या है, इस पर जानकारी की कमी के कारण दिक्कतें, इस के लक्षण, रोग-निदान कैसे होता है, कुछ अन्य तथ्य, उपचार, और अधिक जानकारी और सपोर्ट के लिए उपयोगी संसाधन

अन्य प्रमुख प्रकार के डिमेंशिया पर भी हिंदी पृष्ठ देखें:

कोशिका में लुई बॉडी के चित्र का श्रेय: Marvin 101 (Own work) [CC BY-SA 3.0] (Wikimedia Commons)

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डिमेंशिया और एल्ज़ाइमर्ज़

हालाँकि सुरेश कलमाड़ी की वजह से डिमेंशिया शब्द कुछ दिन सुर्खियों में रहा, परन्तु डिमेंशिया क्या है, इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है. कुछ दिन पहले मनाए गए विश्व एल्ज़ाइमर्ज़ दिवस के दौरान भी कुछ जानकारी अखबारों में छपी, पर डिमेंशिया और एल्ज़ाइमर्ज़ किस तरह से जुड़े है, क्या ये एक ही रोग के दो नाम हैं, या क्या ये अलग हैं, इस को लेकर कई लोगों के मन में तरह तरह के प्रश्न आते हैं.

तो लीजिए, एक संक्षिप्त सा स्पष्टीकरण:

वास्तव में, डिमेंशिया एक बीमारी का नाम नहीं है; यह एक लक्षणों के समूह का नाम है. यह सब लक्षण दिमाग की ताकत कम होने  की वजह से दिखाई देते हैं, और डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति को अनेक जरूरी कार्यों में कठिनाई महसूस होने लगती है.

डिमेंशिया के लक्षणों में से एक प्रमुख लक्षण भूलना हैं, और अक्सर डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों में यह लक्षण ज्यादा आसानी से नज़र आता है. इसी वजह से कई लोग डिमेंशिया को “भूलने कि बीमारी” कहते हैं, पर डिमेंशिया के कई अन्य लक्षण भी हैं, जैसे कि रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत होना, हिसाब न कर पाना, बोलते वक्त सही शब्द न सूझना, निर्णय लेने में दिक्कत, इत्यादि.

डिमेंशिया अनेक कारणों से हो सकता है. एल्ज़ाइमर्ज़ रोग डिमेंशिया का एक आम कारण है, और अनुमान लगाया जाता है कि ५० से ७० प्रतिशत डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों को एल्ज़ाइमर्ज़ होता है. परन्तु डिमेंशिया के अन्य भी कई प्रकार हैं. उदाहरणतः, कुछ लोगों में स्ट्रोक के बाद डिमेंशिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. और पार्किंसन्स रोग से ग्रस्त व्यक्तियों में से तकरीबन एक-तिहाई लोग कुछ वर्षों बाद डिमेंशिया से भी ग्रस्त हो जाते हैं.

तो, डिमेंशिया एक लक्षणों के समूह का नाम है, और यह लक्षण अनेक कारणों से उत्पन्न हो सकते हैं. एल्ज़ाइमर्ज़ रोग एक ऐसा रोग है जिससे डिमेंशिया के लक्षण पैदा होते हैं. हम कह सकते हैं कि एल्ज़ाइमर्ज़ रोग से ग्रस्त व्यक्ति को डिमेंशिया है, परन्तु हर एक डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति को एल्ज़ाइमर्ज़ हो, ऐसा नहीं है. डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों में से ५० से ७० % एल्ज़ाइमर्ज़ के रोगी हैं, और बाकी लोगों को अन्य बीमारियाँ हैं जिनकी वजह से वे ये लक्षण दर्शा रहे हैं.